देहरादून : उत्तराखंड में सरकारी धन की बर्बादी का ताज़ा उदाहरण एक आलीशान रिजॉर्ट में देखने को मिला है। पंचायतीराज निदेशालय ने ग्राम गलवाड़ी स्थित सालवुड फॉरेस्ट रिजॉर्ट में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर ऐसा तामझाम रच दिया जिसने सरकारी मितव्ययिता के सारे दावे धराशायी कर दिए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रशिक्षण में 45 संस्थाओं के मास्टर ट्रेनर्स और निदेशालय के अधिकारी भाग ले रहे हैं। ठहरने से लेकर खाने तक की पूरी व्यवस्था इसी रिजॉर्ट में की गई है, जहां प्रति व्यक्ति खर्च आम सरकारी मानकों से कई गुना अधिक बताया जा रहा है।
इस मामले पर उत्तराखंड गैर सरकारी संगठन महासंघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। महासंघ के राज्य संयोजक जगत सिंह मर्तोलिया ने मुख्यमंत्री को ईमेल के जरिए शिकायत भेजी है, जिसमें निदेशक निधि यादव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
मर्तोलिया ने कहा कि
“जब मुख्यमंत्री स्वयं सरकारी खर्चों में कटौती का उदाहरण पेश कर रहे हैं, तो पंचायतीराज निदेशालय द्वारा ऐसे आलीशान स्थलों पर प्रशिक्षण कराना मितव्ययिता का मज़ाक उड़ाने जैसा है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायतीराज निदेशालय को 220 करोड़ रुपये का बजट ‘खपाने’ के लिए यह प्रशिक्षण महंगे रिजॉर्ट में आयोजित किया गया है। सामान्य सभागारों और सरकारी परिसरों में होने वाले प्रशिक्षण को छोड़कर अफसरों ने रिजॉर्ट संस्कृति को बढ़ावा दिया है।
मर्तोलिया ने चेतावनी दी कि यदि इस फिजूलखर्ची पर रोक नहीं लगाई गई और निदेशक के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो महासंघ राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
वहीं, सूत्रों के अनुसार, कई प्रतिभागियों ने भी इस रिजॉर्ट तक पहुंचने में हुई असुविधा और कठिनाई पर सवाल उठाए हैं।
इस प्रकरण ने न केवल अफसरशाही की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि सरकारी धन किस तरह से ‘विकास’ की आड़ में ‘विलास’ पर खर्च किया जा रहा है।












