अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई गई कथित भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम ने कड़ा कानूनी रुख अपनाया है। उन्होंने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय में एक बड़ा सिविल मानहानि मुकदमा दायर किया है, जिसमें करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक के हर्जाने की मांग की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो, रील्स, पोस्ट और कैप्शन के माध्यम से बिना किसी न्यायिक निष्कर्ष के दुष्यंत गौतम को अंकिता भंडारी हत्याकांड का कथित “VIP” बताकर प्रस्तुत किया गया। इसे याचिका में सीधे तौर पर “सोशल मीडिया ट्रायल” करार दिया गया है।
12 पक्षकार बनाए गए प्रतिवादी
इस सिविल वाद में कुल 12 व्यक्तियों व संस्थाओं को प्रतिवादी बनाया गया है, जिनमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, राजनीतिक दलों के नेता और बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं।
इनमें अभिनेत्री व सोशल मीडिया पर्सनैलिटी उर्मिला सनावर, पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, उनके वरिष्ठ पदाधिकारी, साथ ही X (Twitter), Meta (Facebook–Instagram) और Google (YouTube) जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।
मानहानि का आधार
याचिका के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री में दुष्यंत गौतम पर गंभीर, अप्रमाणित और अपमानजनक आरोप लगाए गए, जिससे उनकी
सामाजिक प्रतिष्ठा
राजनीतिक छवि
व्यक्तिगत सम्मान
को गंभीर क्षति पहुंची है।
याचिका में यह भी उल्लेख है कि इन पोस्ट्स और वीडियो का कोई कानूनी या न्यायिक आधार नहीं है।
अदालत से क्या राहत मांगी गई?
याचिका में अदालत से निम्न प्रमुख राहतों की मांग की गई है—
स्थायी एवं अनिवार्य निषेधाज्ञा (Permanent & Mandatory Injunction)
आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटाने/ब्लॉक करने के निर्देश
भविष्य में ऐसे किसी भी कंटेंट के प्रसार पर पूर्ण रोक
लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक का मानहानि हर्जाना
इसी के तहत 1,97,613 रुपये की कोर्ट फीस भी जमा की गई है।
अदालत में दाखिल याचिका के साथ
30 से अधिक डिजिटल साक्ष्य
सोशल मीडिया वीडियो व पोस्ट के स्क्रीनशॉट
कथित कॉल रिकॉर्डिंग के दावे
तीन FIRs (2026)
उत्तराखंड SC आयोग के पत्र
AI-जनरेटेड/डीपफेक कंटेंट की आशंका
SIT जांच का हवाला
भी प्रस्तुत किया गया है।








