देहरादून : उत्तराखंड की राजनीति पिछले एक महीने से जबरदस्त उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। राज्य की सियासी फिज़ा में सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है अंकिता भंडारी हत्याकांड, जिस पर विपक्ष के साथ-साथ सामाजिक संगठनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी कनेक्शन को लेकर उठ रहे सवालों ने सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विपक्ष राज्य के सभी जिलों में प्रदर्शन कर सीबीआई जांच की मांग को लेकर सड़क पर उतर चुका है।
भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर से जुड़े वायरल ऑडियो-वीडियो ने पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है। इन वायरल क्लिप्स के बाद पार्टी नेतृत्व को बार-बार सफाई देनी पड़ रही है, लेकिन सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे।
तीन नेताओं की प्रेसवार्ता, फिर भी सवाल कायम
मामले को लेकर अब तक भाजपा के तीन वरिष्ठ नेताओं —
विधायक खजान दास,
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल
ने अलग-अलग प्रेसवार्ताओं में पार्टी और सरकार का पक्ष रखा, लेकिन पत्रकारों के तीखे सवालों के सामने कोई ठोस जवाब सामने नहीं आ पाया। यही वजह है कि सियासी असहजता और गहराती जा रही है
अंकिता हत्याकांड से नाम जोड़े जाने के बाद भाजपा नेता दुष्यंत गौतम ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि याचिका दायर की है। वहीं, देहरादून के डालनवाला थाने में बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। इस पूरे प्रकरण के बाद भाजपा में इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है—
पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी,पूर्व राज्य मंत्री भगत राम कोठारी ने न्याय न मिलने का हवाला देकर इस्तीफा दिया,भाजपा युवा मोर्चा के जिला मंत्री अंकित बनखंडी ने भी संगठन से अलग होने का ऐलान किया, इन इस्तीफों ने पार्टी के भीतर गहरे असंतोष को उजागर कर दिया है।
आज सीएम धामी की प्रेसवार्ता पर सबकी नजर
इसी सियासी भूचाल के बीच मंगलवार दोपहर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद मीडिया के सामने आने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि राज्यभर में चल रहे प्रदर्शनों और सीबीआई जांच की मांग को देखते हुए सीएम धामी कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
हालांकि, सीबीआई जांच की घोषणा होगी या नहीं, इसका खुलासा मुख्यमंत्री की प्रेसवार्ता के बाद ही हो पाएगा।










