देहरादून : उत्तराखंड में जंगल की आग को लेकर बनी पुरानी धारणाएं इस सर्दी टूटती नजर आईं। अब तक समुद्र तल से 2,000 मीटर तक सीमित रहने वाली वनाग्नि इस बार 3,000 से 3,500 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गई। चमोली जिले में स्थित नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान, जिसे उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी का सबसे संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्र माना जाता है, जनवरी माह में जंगल की आग की चपेट में आ गया।
हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी के बेसकैंप घांघरिया से करीब 23 किलोमीटर पैदल दूरी पर स्थित गोविंदघाट रेंज में लगी यह आग वन विभाग के लिए भी अप्रत्याशित थी। यह क्षेत्र आमतौर पर सर्दियों में बर्फ और नमी से ढका रहता है, लेकिन इस बार लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण जंगल पूरी तरह सूखे पाए गए।
डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार बद्रीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दुबे ने बताया कि पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र में आग की कोई घटना दर्ज नहीं हुई थी। हवाई सर्वेक्षण में सामने आया कि आग खड़ी और चट्टानी ढलानों पर लगी थी, जहां पहुंचना बेहद जोखिम भरा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना हिमालय में बदलते जलवायु पैटर्न और बढ़ते सूखे का स्पष्ट संकेत है, जो भविष्य में और भी गंभीर संकट खड़े कर सकता है।










