नैनीताल : उत्तराखंड हाई कोर्ट ने उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों से रिटायरमेंट के बाद दिए गए लाभों की वसूली किए जाने के मामले में अहम राहत दी है। शुक्रवार को अवकाशकालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों से किसी भी प्रकार की वसूली पर रोक लगा दी।
मामले में रोडवेज से सेवानिवृत्त जगदीश प्रसाद पंत, राम सिंह और सुरेश मासीवाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने उत्तराखंड परिवहन निगम में कई वर्षों तक संतोषजनक सेवा दी और विधिवत रूप से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद निगम की ओर से उन्हें सभी वैधानिक लाभ प्रदान किए गए।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि अब निगम अचानक उन्हें दिए गए सेवानिवृत्ति लाभों की वसूली के आदेश जारी कर रहा है, जो कि विभागीय नियमावली के साथ-साथ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के भी विरुद्ध है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि एक बार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को विधिसम्मत रूप से दिए गए लाभों की दोबारा वसूली नहीं की जा सकती।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि निगम का यह वसूली आदेश न केवल अवैध है, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ अन्यायपूर्ण भी है, इसलिए इस पर तत्काल रोक लगाई जाए।
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए निगम द्वारा जारी रिकवरी आदेशों पर रोक लगा दी और याचिकाओं का निस्तारण कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से उत्तराखंड परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।










