पूर्व भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी एमएस राजवंशी ने भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जांच रिपोर्ट को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से वापस ले ली है। अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए मामले को खारिज कर दिया।
मामला आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़ा है, जिनके खिलाफ हरियाणा सरकार के कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर केंद्रीय स्तर पर जांच रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस रिपोर्ट में हरियाणा सरकार के कई अधिकारियों पर टिप्पणी की गई थी और कुछ मामलों में सीबीआई जांच की सिफारिश भी की गई थी।
उक्त रिपोर्ट के खिलाफ तत्कालीन सरकार की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सरकार बदलने के बाद भी यह याचिका जारी रखने का निर्णय लिया गया। हालांकि अब पूर्व आईएफएस अधिकारी एमएस राजवंशी ने यह याचिका वापस ले ली है।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिका से संबंधित 8 दिसंबर 2010 की जांच रिपोर्ट और उससे उत्पन्न सभी कार्यवाहियों पर अब कोई विचार नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि संजीव चतुर्वेदी से जुड़ा यह मामला वर्ष 2007 का है, जब हरियाणा सरकार ने उन्हें निलंबित कर चार्जशीट जारी की थी। बाद में उन्होंने भारत सरकार को रिप्रेजेंटेशन सौंपा था। हालांकि राज्य सरकार की ओर से न तो कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही प्रशासनिक कदम उठाए गए।










