हल्द्वानी :हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएम आवास योजना) के तहत चल रहे भौतिक सत्यापन में जिला प्रशासन को कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्रभावित परिवारों को पुनर्वास का लाभ देने के लिए शुरू की गई इस प्रक्रिया में अब सच्चाई सामने आ रही है। कई आवेदकों ने फॉर्म भरते समय यह छुपा लिया था कि उनका अपना पक्का घर उत्तर प्रदेश, दिल्ली या अन्य राज्यों में पहले से मौजूद है। ऐसे में पीएम आवास योजना के सख्त मानकों के अनुसार इन आवेदनों को निरस्त किए जाने की पूरी संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई पुनर्वास प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में साफ कहा था कि यह जमीन रेलवे की है और अतिक्रमण हटाना अनिवार्य है। कोर्ट ने कोई भी परिवार बिना पुनर्वास के बेघर नहीं छोड़े जाने का आश्वासन लिया था। इसी के चलते फरवरी 2026 के फैसले के बाद राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने 20 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक बनभूलपुरा में विशेष कैंप लगाए। इन कैंपों में करीब 7000 प्रभावित परिवारों ने पीएम आवास योजना के फॉर्म जमा किए।
अब इन फॉर्मों की स्क्रूटनी और भौतिक सत्यापन का काम जोरों पर है। जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर 6 टीमें बनाई हैं, जो क्षेत्र के हर घर तक पहुंचकर डोर-टू-डोर भौतिक सत्यापन कर रही हैं। गुरुवार को जागरण की टीम ने भी मौके पर जाकर इस सर्वे का जायजा लिया। टीमें आवेदकों से उनके परिवार, आय, मौजूदा आवास और अन्य संपत्तियों के बारे में विस्तार से पूछताछ कर रही हैं।
डोर-टू-डोर सत्यापन में क्या-क्या सामने आया?
सर्वे के दौरान कई घरों में टीमों ने जब आवेदकों से पूछा कि क्या उनका कोई अन्य मकान कहीं और है, तो चौंकाने वाले जवाब मिले। करीब चार परिवारों में यह बात सामने आई कि उनका पक्का घर उत्तर प्रदेश या दिल्ली जैसे दूसरे राज्यों में पहले से बना हुआ है। फॉर्म जमा करते समय इस महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छुपाया गया था।
पीएम आवास योजना के नियमों के मुताबिक, लाभ लेने के लिए परिवार के किसी सदस्य के नाम पर देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। अगर यह पाया जाता है तो आवेदन सीधे निरस्त हो जाता है। जिला प्रशासन के अधिकारी बताते हैं कि सर्वे पूरा होने के बाद सभी फॉर्मों की जांच एक प्रशासनिक कमेटी करेगी। इसके बाद अंतिम सूची सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी।
पीएम आवास योजना के पात्रता मानक और महत्व
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) को सस्ते मकान उपलब्ध कराती है। बनभूलपुरा मामले में मुख्य रूप से EWS श्रेणी के प्रभावित परिवारों को लाभ दिया जा रहा है।
पात्रता की मुख्य शर्तें:
परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
परिवार के किसी सदस्य के नाम पर देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए।
आवेदक को रेलवे अतिक्रमण प्रभावित क्षेत्र में रहने वाला साबित करना होगा।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो आवेदक इन शर्तों को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, कोर्ट के निर्देशानुसार पात्र परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि कोई भी बिना सहायता के बेघर न रहे।
प्रशासन की आगे की कार्ययोजना क्या है?
सर्वे कार्य अभी जारी है। 6 टीमें सुबह से शाम तक क्षेत्र में घूम रही हैं। हर आवेदक के घर पहुंचकर फोटो, दस्तावेज और मौखिक जानकारी ली जा रही है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखने के लिए हर टीम में रेलवे, नगर निगम, राजस्व और विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक, सर्वे पूरा होने के बाद सभी रिपोर्ट तैयार की जाएंगी। इन रिपोर्टों के आधार पर पात्र-अपात्र की सूची बनाकर सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। कोर्ट की मंजूरी के बाद ही अंतिम लाभार्थी सूची जारी होगी। जो आवेदन निरस्त होंगे, उनके लिए अलग से कारण बताए जाएंगे।












