देहरादून : उत्तराखंड सरकार शहद उत्पादन को बढ़ावा देकर राज्य को देश का प्रमुख हनी हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में मौनपालन नीति का प्रस्ताव पास होने की संभावना है। इस नीति के तहत राज्य के घने जंगलों में भी मौनबॉक्स (बी बॉक्स) लगाकर वैज्ञानिक तरीके से शहद उत्पादन किया जाएगा।
वन विभाग ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। कैबिनेट की मुहर लगने के बाद पूरे राज्य के लिए Standard Operating Procedure (SOP) तैयार की जाएगी, जिसमें जंगलों में मौनपालन की अनुमति, सुरक्षा मानक, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के लिए लाभ सुनिश्चित करने के प्रावधान शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री धामी का विजन: वन क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधि से जोड़ना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड वन विकास निगम के रजत जयंती समारोह के दौरान प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के 71.05 प्रतिशत वन भूभाग को मौनपालन के लिए उपयोग में लाया जाए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और रोजगार के नए अवसर सृजित हों।
सीएम धामी ने अपने आवास परिसर के उद्यान और गांव नगला तराई में मौनपालन के सफल अनुभव का जिक्र किया। हाल ही में उनके आवास पर मात्र 45 दिनों में 520 किलोग्राम शहद का उत्पादन हुआ, जो इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि वन क्षेत्रों में मौनपालन से न केवल शहद उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि परागण (pollination) के माध्यम से वनस्पतियों की विविधता और कृषि उत्पादकता भी बढ़ेगी।0ae503
वर्तमान स्थिति और लक्ष्य
वर्तमान में उत्तराखंड में प्रतिवर्ष लगभग 3300 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन होता है और 10,000 से अधिक लोग सीधे मौनपालन से जुड़े हुए हैं। सरकार पहले ही मौनबॉक्स पर सब्सिडी, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। नई नीति के बाद जंगलों को शामिल करने से उत्पादन में कई गुना वृद्धि की उम्मीद है।
मौनपालन नीति-2026 के माध्यम से सरकार का उद्देश्य है:
ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना
उच्च गुणवत्ता वाला ऑर्गेनिक और औषधीय शहद उत्पादन बढ़ाना
वन संरक्षण के साथ आर्थिक विकास का संतुलन बनाना
उत्तराखंड को शहद निर्यात में अग्रणी राज्य बनाना
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में मौनपालन से स्थानीय समुदायों की आय बढ़ेगी और वन संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित होगा।
आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व
मौनपालन न केवल शहद और मोम जैसी उपज देता है, बल्कि फसल उत्पादन में 30-40 प्रतिशत तक वृद्धि करने में मदद करता है। उत्तराखंड की समृद्ध वनस्पति—खासकर हिमालयी फूल, जड़ी-बूटियां और फलदार वृक्ष—उच्च गुणवत्ता वाले शहद के लिए आदर्श हैं।
सरकार की इस पहल से पलायन रोकने, महिलाओं के सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान की उम्मीद है। कैबिनेट बैठक में खाद्य, शिक्षा, वित्त, राजस्व, पर्यटन और स्वास्थ्य विभागों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा और निर्णय होने की संभावना है।








