घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की लगातार हो रही कमी ने इन दिनों कई परिवारों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में इस समस्या ने एक शादी को अनोखा मोड़ दे दिया। शादी के जयमाल कार्यक्रम से ठीक पहले दूल्हे ने अपनी होने वाली दुल्हन से चूल्हे पर खाना बनाने की शर्त रख दी। दुल्हन के समझदार जवाब ने न सिर्फ शादी को आगे बढ़ाया, बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
अनोखी शर्त और दुल्हन का साहसिक जवाब
बाराबंकी जिले के थाना लोनी कटरा क्षेत्र के ग्राम खैरा बीरू के रहने वाले अशोक कश्यप (पुत्र देवीदीन कश्यप) की बारात 27 अप्रैल को उन्नाव जिले के ग्राम खानपुर (पोस्ट मवई, थाना मौरवा) पहुंची। यहां दुल्हन लक्ष्मी कश्यप (पुत्री रामनरेश कश्यप) के साथ जयमाल की रस्म होनी थी।
जयमाल स्टेज पर पहुंचते ही अशोक कश्यप ने अचानक दुल्हन से सवाल कर दिया – “अगर भविष्य में रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत ऐसी ही बनी रही, तो क्या तुम लकड़ी के चूल्हे पर खाना बना पाओगी?”
यह सवाल सुनकर दुल्हन पक्ष के लोग सकपका गए। लेकिन लक्ष्मी कश्यप ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया, “हां, मैं चूल्हे पर खाना बना लूंगी। जरूरत पड़ी तो खेत में काम भी कर सकती हूं।”
दुल्हन के इस व्यावहारिक और सकारात्मक जवाब ने दूल्हे को संतुष्ट कर दिया। इसके बाद पूरे रीति-रिवाज से जयमाल संपन्न हुई और शादी की अन्य रस्में धूमधाम से पूरी की गईं।
गैस सिलेंडर की किल्लत: दूल्हे की मजबूरी
अशोक कश्यप ने शादी से कुछ दिन पहले घरेलू गैस सिलेंडर लेने के लिए अनामिका इंडियन गैस एजेंसी के कई चक्कर काटे। हर बार लंबी लाइन में लगने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल पाया। कई बार लाइन में खड़े रहते-रहते गैस खत्म हो जाती। इस परेशानी ने दूल्हे को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी भविष्य की गृहस्थी को लेकर पहले ही स्पष्टता चाही।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि शादी के большейांश कार्यक्रम लकड़ी और पारंपरिक चूल्हे के भरोसे ही संपन्न हुए। गैस की कमी ने शादी की तैयारियों को भी प्रभावित किया।
ग्रामीण स्तर पर गैस संकट की बढ़ती समस्या
यह घटना यूपी के ग्रामीण इलाकों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। कई गांवों में एजेंसियों पर लंबी लाइनें लगना आम बात हो गई है। शादी-ब्याह जैसे मौकों पर यह समस्या और गंभीर रूप ले लेती है।
दूल्हा अशोक कश्यप की यह शर्त वास्तव में भविष्य की अनिश्चितताओं के प्रति एक व्यावहारिक सोच को दर्शाती है। वहीं, दुल्हन लक्ष्मी का जवाब ग्रामीण महिलाओं की सहनशीलता, समझदारी और घर-खेत दोनों संभालने की क्षमता को उजागर करता है।









