देहरादून : आईआरआईए उत्तराखंड स्टेट चैप्टर के तत्वावधान में श्री महंत इंद्रेश अस्पताल में एक दिवसीय कन्टीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “फीटल ईकोकार्डियोग्राफी (Fetal Echo)” रहा, जिसमें गर्भावस्था के दौरान शिशु के हृदय की विस्तृत जांच, जन्मजात हृदय रोगों (Congenital Heart Diseases – CHD) की समय पर पहचान और आधुनिक उपचार रणनीतियों पर विस्तार से मंथन हुआ।
फीटल ईको: गर्भस्थ शिशु के लिए वरदान
फीटल ईको एक उन्नत अल्ट्रासाउंड तकनीक है जो गर्भ में पल रहे शिशु के हृदय की संरचना, धड़कन, वाल्व, रक्त प्रवाह और समग्र कार्यप्रणाली का विस्तृत मूल्यांकन करती है। यह जांच आमतौर पर गर्भावस्था के 18-24 सप्ताह के बीच की जाती है, हालांकि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं में पहले भी संभव है।

डॉ. सी. कृष्णा, बेंगलुरु के मुख्य वक्ता ने विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 8-10 में से 1 नवजात शिशु जन्मजात हृदय दोष से प्रभावित होता है। फीटल ईको के माध्यम से इनमें से कई गंभीर दोषों (जैसे टेट्रालॉजी ऑफ फॉलोट, ट्रांसपोजिशन ऑफ ग्रेट आर्टरीज, वाल्व असामान्यताएं आदि) की गर्भ में ही पहचान हो जाती है। इससे जन्म के तुरंत बाद विशेषज्ञ टीम तैयार रहती है, जिससे शिशु की 생रक्षा दर में उल्लेखनीय सुधार होता है।
लाइव डेमो और व्यावहारिक प्रदर्शन
सीएमई के दौरान फीटल ईको का लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने वास्तविक केस के माध्यम से जांच की प्रक्रिया, इमेजिंग तकनीक और निदान के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाया। प्रतिभागी चिकित्सकों ने सक्रिय रूप से चर्चा की और अपने अनुभव साझा किए।
आईआरआईए उत्तराखंड स्टेट चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र गर्ग और सचिव डॉ. प्राची काला ने कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक कार्यक्रम चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों से अपडेट रखते हैं और उत्तराखंड में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाते हैं।
मुख्य अतिथियों का संबोधन
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. मनोज शर्मा, सीएमओ देहरादून ने कहा, “फीटल ईको जैसी आधुनिक तकनीकें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को नई दिशा दे रही हैं। गर्भावस्था के दौरान हृदय संबंधी जटिलताओं की पहचान से समय पर हस्तक्षेप संभव होता है, जिससे नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा में बड़ी मदद मिलती है।”

डॉ. प्रथापन पिल्लई, कुलपति, श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय ने जोर दिया कि विश्वविद्यालय और संबद्ध अस्पताल चिकित्सा शिक्षा, शोध और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। डॉ. उत्कर्ष शर्मा, प्राचार्य तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का उद्देश्य और प्रभाव
इस सीएमई में उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से आए रेडियोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ और प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज एवं श्री महंत इंद्रेश अस्पताल के सभागार में संपन्न हुआ।

विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि नियमित प्रसव पूर्व जांच के साथ-साथ संदिग्ध मामलों में फीटल ईको अनिवार्य हो जाना चाहिए। यह तकनीक न केवल शिशु की जान बचाती है बल्कि परिवारों पर मानसिक और आर्थिक बोझ को भी कम करती है।









