देहरादून : देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज (GDMC) में सामने आए मेस घोटाले ने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में जहां गड़बड़ी की रकम करीब 5 लाख रुपये मानी जा रही थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 80 लाख रुपये तक पहुंच गया है। मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि छात्रों से मेस फीस कॉलेज के अधिकृत खाते की बजाय निजी QR कोड के माध्यम से वसूली गई।
सूत्रों के अनुसार, मेस संचालन से जुड़े व्यक्ति ने कॉलेज के नाम से मिलता-जुलता QR कोड छात्रों को उपलब्ध कराया था। कई छात्रों को यह विश्वास दिलाया गया कि भुगतान सीधे कॉलेज प्रशासन के खाते में जा रहा है। इसी भरोसे में 2023, 2024 और 2025 बैच के करीब 500 छात्रों ने ऑनलाइन भुगतान किया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ छात्रों ने फीस भुगतान से जुड़े दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट की जांच करवाई। इसके बाद एक-एक कर कई छात्र सामने आए और उन्होंने दावा किया कि उनसे मेस फीस के नाम पर बड़ी रकम वसूली गई। छात्रों ने आरोप लगाया कि भुगतान लेने के बाद भी कई बार मेस सेवाओं को लेकर समस्याएं बनी रहीं।
कॉलेज प्रशासन ने अब पूरे मामले की जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर बिलिंग विभाग और कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक यह खेल कैसे चलता रहा और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
बिलिंग सिस्टम और कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल, छात्रों ने मांगी सख्त कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रों को पहले मेस फीस के लिए डिमांड ड्राफ्ट या निर्धारित भुगतान प्रक्रिया की जानकारी दी जाती थी, लेकिन बाद में उन्हें QR कोड के जरिए सीधे भुगतान करने को कहा गया। कई छात्रों का कहना है कि उन्हें यह बताया गया था कि यह प्रक्रिया कॉलेज प्रशासन की ओर से अधिकृत है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों की मदद से भुगतान रिकॉर्ड और एंट्री सिस्टम को मैनेज किया जाता था। यही कारण रहा कि लंबे समय तक यह अनियमितता पकड़ में नहीं आई। मामले के उजागर होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने संबंधित कंपनी और जिम्मेदार व्यक्तियों को नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
छात्रों और अभिभावकों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की वित्तीय अनियमितता बेहद गंभीर मामला है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।










