उत्तराखंड राज्य के दो बार मुख्यमंत्री रहे, सेवानिवृत्त मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी (बीसी खंडूरी) का मंगलवार सुबह अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनकी उम्र 91 वर्ष थी। उनकी मृत्यु की खबर आते ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई प्रमुख नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
भुवन चंद खंडूरी का प्रारंभिक जीवन और सैन्य सेवा
भुवन चंद खंडूरी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में हुआ था। उन्होंने 1954 से 1990 तक भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स में सेवा दी। अपनी सेवा के दौरान उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) से सम्मानित किया गया। मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वे अनुशासन और ईमानदारी के प्रतीक बनकर उभरे।e37f555b6719
राजनीतिक सफर: सेना से संसद तक
सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आग्रह पर खंडूरी जी राजनीति में आए और भाजपा से जुड़े। 1991 में पहली बार गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। उन्होंने कई बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया।
अटल सरकार में वे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे और बाद में कैबिनेट मंत्री बने। उनके कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति मिली, जिसने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल:
पहला: मार्च 2007 से जून 2009 तक
दूसरा: सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक (रमेश पोखरियाल निशंक के इस्तीफे के बाद)
वे राज्य में भ्रष्टाचार मुक्त शासन के प्रबल समर्थक रहे और लोकायुक्त की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए।
उत्तराखंड के लिए अमूल्य योगदान
खंडूरी जी उत्तराखंड राज्य आंदोलन के मजबूत हिमायती थे। संसद में उन्होंने पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को प्रभावी ढंग से उठाया। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने:
पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति और पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दिया।
आपदा प्रबंधन और युवा रोजगार को प्राथमिकता दी।
अनुशासनिक शासन शैली अपनाकर पारदर्शिता और ईमानदारी की मिसाल पेश की।
सेना की पृष्ठभूमि के कारण वे दृढ़ फैसले लेने के लिए जाने जाते थे। उनके कार्यकाल को उत्तराखंड के विकास में स्थिरता और प्रगति का दौर माना जाता है। उनकी पुत्री रितु खंडूरी भूषण उत्तराखंड विधानसभा की पूर्व स्पीकर रह चुकी हैं, जबकि परिवार राजनीति में सक्रिय रहा है।
विरासत और श्रद्धांजलि
मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी एक सच्चे सैनिक-राजनेता थे, जिन्होंने देश और देवभूमि की सेवा को अपना जीवन मिशन बनाया। उनकी सादगी, अनुशासन और ईमानदारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि खंडूरी जी का योगदान उत्तराखंड के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगा। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में शोक व्यक्त करते हुए आवश्यक प्रबंध किए हैं।









