देहरादून : उत्तराखंड की आध्यात्मिक नगरी देहरादून स्थित श्री दरबार साहिब में परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के महानिर्वाण दिवस पर भक्ति, श्रद्धा और सेवा का अद्भुत मेल देखने को मिला। पूजनीय सज्जादे गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने श्री झण्डे जी पर विशेष पूजा-अर्चना कर समस्त मानव जाति के कल्याण, विश्व शांति एवं समृद्धि की कामना की।

देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर पहुंचे। उन्होंने अपने पूज्य गुरुदेव को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके बताए मार्ग—सेवा, समर्पण, प्रेम तथा मानवता—पर चलने का संकल्प लिया। पूरे परिसर में गुरु भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का दिव्य वातावरण छाया रहा।
सेवा दिवस के रूप में मनाया गया महानिर्वाण दिवस, 101 यूनिट रक्तदान
महानिर्वाण दिवस को केवल स्मृति दिवस न बनाकर सेवा दिवस के रूप में मनाने की परंपरा को चरितार्थ करते हुए श्री दरबार साहिब परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। संगतों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कुल 101 यूनिट रक्त संग्रहित हुआ।


श्रद्धालुओं का मानना है कि रक्तदान महादान है। जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा करना ही सच्ची गुरु सेवा है। इस शिविर में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए भक्तों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। रक्तदान करने वाले श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु महाराज की स्मृति में यह छोटा सा प्रयास उनके दिए मानव सेवा के संदेश को आगे बढ़ाने का माध्यम है।
लंगर, प्रसाद और शबील के साथ चला जनकल्याण का कार्यक्रम
महानिर्वाण दिवस के अवसर पर श्री दरबार साहिब परिसर में नि:शुल्क लंगर, प्रसाद और शबील का भव्य आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और गुरु महाराज के प्रति अपनी असीम श्रद्धा व्यक्त की।
परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज ने अपने पूरे जीवन में सेवा, परोपकार और मानव कल्याण का जो आदर्श प्रस्तुत किया, उसी प्रेरणा से यह पूरा कार्यक्रम आयोजित किया गया। गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने कहा कि गुरु की शिक्षाओं को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
गुरु महाराज की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक
परमपूज्य श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज ने अपने जीवनकाल में सदैव सेवा और मानवता के संदेश पर जोर दिया। आज उनके महानिर्वाण दिवस पर श्रद्धालु न केवल उन्हें याद कर रहे हैं बल्कि उनकी शिक्षाओं को व्यवहार में ला रहे हैं। रक्तदान शिविर इसका जीवंत उदाहरण है।
यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। इसमें रक्त की कमी दूर करने के साथ-साथ समाज में सेवा भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।









