चमोली : बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में चढ़ावे की धनराशि में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद अब समिति की समग्र व्यवस्था और दान प्राप्त संपत्तियों के प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ताजा विवाद दो हाईटेक एंबुलेंस और एक टेंपो ट्रेवलर से जुड़ा है, जो दानदाताओं द्वारा समिति को भेंट किए गए थे, लेकिन वर्तमान में बदरीनाथ धाम में इनकी कोई जानकारी नहीं है।
दान में मिली हाईटेक एंबुलेंसों का इतिहास
वर्ष 2018 में एक दानदाता ने बीकेटीसी को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित एक एंबुलेंस दान की थी। इसके बाद उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड के गठन के दौरान एक अन्य दानदाता ने दूसरी हाईटेक एंबुलेंस समिति को सौंपी। दोनों वाहनों का उद्देश्य बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था।
इन एंबुलेंसों में ऑक्सीजन, डिफिब्रिलेटर, मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य जरूरी इमरजेंसी मेडिकल उपकरण होने की जानकारी थी, ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्र में यात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा दी जा सके। साथ ही एक टेंपो ट्रेवलर भी दान में प्राप्त हुआ था, जिसका उपयोग परिवहन और लॉजिस्टिक्स के लिए किया जाना था।
वाहन कहां गायब? समिति अधिकारियों का मौन
स्थानीय सूत्रों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इन तीनों वाहनों को बदरीनाथ धाम में कभी नियमित रूप से संचालित होते नहीं देखा गया। हैरानी की बात यह है कि जब इन वाहनों की वर्तमान स्थिति के बारे में समिति के जिम्मेदार अधिकारियों से पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें इन वाहनों के धाम में मौजूद होने की कोई जानकारी नहीं है।
यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि चारधाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य आपातकालीन सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। ऊंचाई, मौसम की प्रतिकूलता और बड़ी संख्या में आने वाले यात्री इन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
आरटीआई में भी जवाब नहीं, बढ़ती आशंकाएं
एक नागरिक ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत इन एंबुलेंसों की खरीद, उपयोग, रखरखाव और वर्तमान लोकेशन की जानकारी मांगी थी। समिति की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिससे विभिन्न आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं। कुछ लोग दान की गई संपत्तियों के दुरुपयोग या गबन की आशंका जता रहे हैं।
यह मामला चढ़ावे की राशि में कथित हेराफेरी के आरोपों के बाद आया है, जिससे समिति की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना समिति की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
पारदर्शिता की मांग और भविष्य की दिशा
धार्मिक स्थलों पर प्राप्त दान और संपत्तियों का उचित उपयोग जनता का अधिकार है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीकेटीसी को इन दान की गई संपत्तियों की पूरी डिटेल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करानी चाहिए। वाहनों का रजिस्ट्रेशन, सर्विस रिकॉर्ड, जीपीएस लोकेशन और उपयोग का लॉग सार्वजनिक डोमेन में होना चाहिए।








