चमोली : देवभूमि उत्तराखंड में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की संपत्तियों पर अवैध कब्जे की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। समिति के सैकड़ों भवनों, दुकानों और जमीनों पर नाम मात्र का किराया देने वाले या बिना किराया दिए कब्जा जमाए हुए लोग वर्षों से बैठे हैं। लीज समाप्त होने के बावजूद इन संपत्तियों को खाली कराने में प्रशासनिक उदासीनता साफ दिख रही है।
अवैध कब्जों की वर्तमान स्थिति
बदरी-केदार मंदिर समिति के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ा ने स्पष्ट किया कि समिति की ओर से 185 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासनों के साथ लंबे समय से पत्राचार चल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। न तो सीमांकन कराया जा रहा है और न ही अवैध कब्जों को हटाने के लिए गंभीर प्रयास हो रहे हैं।
केदारनाथ और बदरीनाथ मार्ग पर स्थित समिति की कई दुकानों और भवनों पर 10 रुपये से 50 रुपये मासिक किराए पर कब्जा है। कई वर्षों से यह किराया भी नहीं दिया जा रहा है। चारधाम यात्रा सीजन के दौरान इन मामलों पर ध्यान कम दिया गया, लेकिन अब समिति इन संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है।
अरबों की संपत्ति कहां-कहां पर कब्जे में?
मंदिर समिति की संपत्तियां न केवल चारधाम क्षेत्र में बल्कि पूरे देश में फैली हुई हैं। इनमें से कई प्राइम लोकेशन पर स्थित हैं, जिनकी कुल कीमत अरबों रुपये में आंकी जा रही है। प्रमुख जगहें इस प्रकार हैं:
देहरादून: कारगी, डोभालवाला और कैनाल रोड क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे।
रामनगर: 42 बीघा जमीन खुर्द-बुर्द हो रही है।
चमोली: पांडुकेश्वर और बामणी गांव में दुकानों, परिसंपत्तियों और भूमि पर अवैध निर्माण।
हल्द्वानी: समिति की जमीनों का उपयोग नहीं हो पा रहा।
लखनऊ: 11,020 वर्ग फीट जमीन पर जर्जर भवन मौजूद, जिस पर कब्जा बना हुआ है।
मुरादनगर: 17 एकड़ भूमि पर विवाद जारी।
अन्य राज्य: महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में समिति की संपत्तियां प्रभावित।
कुल मिलाकर 3,66,312 वर्ग मीटर भूमि से जुड़े विवादों को सुलझाना बाकी है।
केवल चढ़ावा नहीं, संपत्ति भी लुट रही है
सीईओ रांगड़ा ने चिंता जताते हुए कहा कि दान-चढ़ावे में लूट के साथ-साथ समिति की संपत्तियां भी पिछले 10 वर्षों से लगातार खुर्द-बुर्द हो रही हैं। चारधाम यात्रा से जुड़ी विशाल आय के बावजूद इन संपत्तियों का उचित उपयोग नहीं हो पा रहा, जो मंदिर विकास कार्यों को प्रभावित कर रहा है।









