कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से ठीक पहले एक दुखद हादसा हो गया। कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान लोहे के पिलर के गिरने से कांग्रेस कार्यकर्ता अमर सिंह मेहता की मौत हो गई। यह घटना सनातन धर्म इंटर कालेज, बन्नू रेसकोर्स में हुई, जहां मंच और पंडाल की सजावट चल रही थी।
हादसे का विवरण
शुक्रवार को होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान अचानक लोहे का एक भारी पिलर गिर पड़ा। इससे अमर सिंह मेहता गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत सीएमआई अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. महेश कुड़ियाल ने निधन की पुष्टि की।
अमर सिंह मेहता महानगर महामंत्री आलोक मेहता के पिता थे। उनकी मौत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। घटना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और कार्यकर्ता सदमे में आ गए।
‘छात्रों की गूंज’ अभियान का संदर्भ
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक, बढ़ती कोचिंग फीस और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। यह अभियान कोटा से शुरू हुआ था और देश के विभिन्न शहरों में विस्तारित हो रहा है। बन्नू स्कूल मैदान में शुक्रवार शाम को प्रस्तावित कार्यक्रम छात्रों की समस्याओं को आवाज देने वाला था
हादसे के बाद कार्यक्रम की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि क्या मंच निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।
पुलिस जांच शुरू
पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पिलर गिरने के पीछे संभवतः निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता, अनुचित तरीके से लगाना या मौसम संबंधी कारक हो सकते हैं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि ठेकेदारों और आयोजकों ने निर्माण कार्य के दौरान आवश्यक सेफ्टी प्रोटोकॉल्स का पालन किया या नहीं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने कांग्रेस पार्टी के अंदर शोक का माहौल बना दिया है। कई नेताओं ने अमर सिंह मेहता को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। आलोक मेहता और उनके परिवार को इस अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे हादसे बड़े कार्यक्रमों की तैयारियों में सुरक्षा की अहमियत को रेखांकित करते हैं। ‘छात्रों की गूंज’ जैसे जन-आंदोलन वाले कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी होती है, इसलिए आयोजन स्थल पर उच्च स्तर की सुरक्षा और सतर्कता जरूरी है।
सुरक्षा मानकों पर उठते सवाल
क्या निर्माण कार्य के लिए योग्य इंजीनियरों और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई थी?
क्या हेवी स्ट्रक्चर्स के लिए पर्याप्त सपोर्ट और ब्रेसिंग का इंतजाम था?
मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए क्या बैकअप प्लान तैयार था?








