टाइटल: आजादी के दशकों बाद भी सड़क से महरूम उदावा गांव! दुल्हन 18 KM पैदल चलकर पहुंची ससुराल, CM धामी से लगाई गुहार
जरा सोचिए… शादी का दिन हो, नई जिंदगी की शुरुआत हो और दुल्हन को अपनी ससुराल पहुंचने के लिए घंटों पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलना पड़े! इतना ही नहीं, गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त निकलने की चिंता में उसे रास्ते में दौड़ तक लगानी पड़े। यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि उत्तराखंड के चकराता ब्लॉक के उदावा गांव की हकीकत है।
आजादी के दशकों बाद भी इस दुर्गम गांव तक सड़क सुविधा नहीं पहुंच सकी है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में तो भुगतना ही पड़ता है, लेकिन शादी-विवाह जैसे खुशी के मौके पर भी उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, बीते मंगलवार को उदावा गांव के अनिल चौहान की शादी बुल्हाड़ गांव की शर्मिला से हुई। दुल्हन बरात के साथ वाहन में लोखंडी तक पहुंची, लेकिन इसके आगे उदावा गांव तक सड़क नहीं होने के कारण उसे पहाड़ी रास्तों से पैदल सफर करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि दुल्हन ने लोखंडी से करीब 18 किलोमीटर का सफर लगभग चार घंटे में पैदल तय किया। गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त निकलने की चिंता ऐसी थी कि शर्मिला रास्ते में दौड़ती हुई भी नजर आईं।
ग्रामीणों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दुल्हन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील करती नजर आ रही हैं। शर्मिला बताती हैं कि वह बरात के साथ पैदल अपने ससुराल जा रही हैं और लंबा रास्ता तय करने के कारण काफी थक चुकी हैं। उन्हें चिंता है कि कहीं गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त न निकल जाए, इसलिए उन्हें दौड़ना पड़ रहा है।
अब सवाल यह है कि जब देश विकास के नए-नए दावे कर रहा है, तो पहाड़ के इन गांवों तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा आखिर कब पहुंचेगी? क्या उदावा गांव के लोगों को सड़क के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा?
यह मामला सिर्फ एक दुल्हन के संघर्ष का नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों की परेशानी का भी है, जो आज भी सड़क सुविधा के अभाव में मुश्किल जिंदगी जीने को मजबूर हैं।









