देहरादून: उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पिछले कई महीनों से जारी जनाक्रोश, राजनीतिक घमासान और सामाजिक दबाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए इस मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का ऐलान कर दिया है।
राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब तक एसआईटी और राज्य पुलिस द्वारा की जा रही जांच पर विराम लगेगा और सीबीआई देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल इस हत्याकांड की स्वतंत्र, निष्पक्ष और गहन जांच करेगी।
क्यों लिया गया CBI जांच का फैसला?
अंकिता भंडारी की हत्या के बाद से ही पीड़ित परिवार, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और आम जनता द्वारा लगातार सीबीआई जांच की मांग उठाई जा रही थी। आरोप लग रहे थे कि मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है और कई अहम तथ्यों को दबाया गया है।
राज्यभर में सड़कों पर प्रदर्शन, धरना, सोशल मीडिया अभियान और विपक्षी दलों के हमलों के बीच सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी ने यह फैसला लिया ताकि मामले की सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके और किसी भी दोषी को बख्शा न जाए।
पीड़ित परिवार को मिला भरोसा
सीबीआई जांच की घोषणा के बाद अंकिता भंडारी के माता-पिता और परिजनों ने उम्मीद जताई है कि अब उन्हें न्याय मिलेगा। परिवार का कहना है कि राज्य एजेंसियों की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं था और वे लंबे समय से सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे।









