ढाका : बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में इस बार राजनीतिक तस्वीर ने बड़ा उलटफेर दिखाया। मुख्य विपक्षी दल Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने निर्णायक बढ़त हासिल कर सरकार बनाने की दिशा में मजबूत दावा ठोक दिया है। दूसरी ओर कई छोटी और मध्यम दल उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके।
छात्र आंदोलन से निकली NCP का फीका प्रदर्शन
पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina सरकार के खिलाफ आंदोलनों में सक्रिय रहे छात्र नेताओं द्वारा बनाई गई National Citizen Party (NCP) से इस बार बड़े असर की उम्मीद थी। हालांकि चुनावी मैदान में पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई। यह दल Jamaat-e-Islami के गठबंधन का हिस्सा था, लेकिन वोटों को सीटों में तब्दील करने में असफल रहा।
‘भारत’ जैसे नाम और प्रतीकों ने खींचा ध्यान
चुनाव की एक रोचक पहलू यह रहा कि कई ऐसी पार्टियां मैदान में थीं, जिनके नाम या चुनाव चिह्न भारतीय राजनीति की याद दिलाते हैं।
Bangladesh Jatiya Party (BJP) को एक सीट हासिल हुई। दिलचस्प बात यह है कि इसका चुनाव चिह्न कमल नहीं, बल्कि बैलगाड़ी है।
हाथी चिन्ह वाली Bangladesh Republican Party (BRR) और साइकिल प्रतीक वाली एक जातीय पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकीं।
हाथ के निशान वाली Bangladesh Muslim League (BML) और लालटेन प्रतीक वाली पार्टी को भी मतदाताओं ने नकार दिया।
भारतीय संदर्भ में हाथी और साइकिल जैसे प्रतीक क्रमशः Bahujan Samaj Party (BSP) और Samajwadi Party से जुड़े रहे हैं, जिससे इस चुनाव में प्रतीकों को लेकर खास चर्चा देखने को मिली।
सत्ता समीकरण पर क्या असर?
BNP की बढ़त से साफ है कि मतदाताओं ने बदलाव का संकेत दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन समीकरण और छोटे दलों का प्रदर्शन आने वाले दिनों में सरकार गठन की तस्वीर और स्पष्ट करेगा। छात्र राजनीति से निकले नए दलों की सीमित सफलता भी यह बताती है कि आंदोलन की ऊर्जा को चुनावी जीत में बदलना आसान नहीं होता।











