देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र में स्थित जगत जीवन ज्योति पीठ (गुरुकुल) के संचालक और शिक्षक जनार्धन बिंजोला को एक किशोरी के साथ बार-बार दुष्कर्म के गंभीर मामले में दोषी ठहराया गया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी शुक्ला की फास्ट ट्रैक अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही 50,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
घटना का विवरण
यह अपराध 2019 से 2021 के बीच हुआ। पीड़िता, जो उस समय मात्र 13 वर्ष की थी, जगत जीवन ज्योति पीठ में छात्रा के रूप में पढ़ाई कर रही थी और संस्थान के हॉस्टल में रहती थी। जनार्धन बिंजोला संस्थान के संचालक थे और बच्चियां उन्हें “पापा” कहकर बुलाती थीं।
पीड़िता की मां ने अदालत में बताया कि उनकी बेटी ने लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी। जुलाई 2021 में जब एक अन्य पीड़िता ने संस्थान के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई, तब मां ने अपनी बेटी से पूछताछ की। बेटी रो पड़ी और उसने पूरी घटना बयान की – कि बिंजोला ने कई बार उसके साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म किया। एक बार सिरदर्द के बहाने उसे अपने कमरे में बुलाकर रात में अपराध किया। पीड़िता ने इसकी जानकारी सहकर्मी ओपर्णा उर्फ दोपी संगमा को बताई, लेकिन उसे चुप रहने को कहा गया।
पीड़िता को मां से बात करने पर भी फोन स्पीकर पर रखा जाता था और परिवार से मिलने नहीं दिया जाता था। विरोध करने पर जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं।
सजा और अन्य आरोपी
अदालत ने जनार्धन बिंजोला को मुख्य दोषी मानते हुए सजा सुनाई। सहआरोपी ओपर्णा उर्फ दोपी संगमा को कुछ धाराओं में दोषमुक्त कर दिया गया और जुर्माने के बाद रिहा करने का आदेश दिया।
यह जनार्धन बिंजोला का दूसरा दोषसिद्ध मामला है। फरवरी 2026 में ही एक अन्य 12 वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म के मामले में भी उन्हें 20 वर्ष की सजा सुनाई जा चुकी है (कुछ रिपोर्टों में जुर्माना 95,000 रुपये तक बताया गया)।
यह मामला POCSO एक्ट और संबंधित धाराओं के तहत चला, जिसमें नाबालिग के साथ यौन शोषण की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा दी गई।











