हल्द्वानी : हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल (एसटीएच) में डॉक्टरों की लगातार कमी गंभीर समस्या बन गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी से संबद्ध इस प्रमुख अस्पताल से पिछले छह महीनों में लगभग छह विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है, जिससे मरीजों को इलाज में भारी परेशानी हो रही है।
ताजा मामला ईएनटी (नाक, कान, गला) विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शहजाद अहमद का इस्तीफा है। इससे विभागीय सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। अस्पताल रोजाना कुमाऊं क्षेत्र के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से 1800-2000 मरीजों को बेहतर और सस्ता इलाज देने की उम्मीद से आते हैं, लेकिन डॉक्टरों और संसाधनों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में कुल स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 46 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। इस्तीफा देने वाले कुछ डॉक्टरों ने अस्पताल के आसपास ही प्राइवेट प्रैक्टिस शुरू कर दी है, जबकि अन्य राज्य छोड़कर दूसरे मेडिकल कॉलेजों में चले गए हैं।
हाल में इस्तीफा देने वाले प्रमुख डॉक्टर:
सर्जरी विभाग: असिस्टेंट प्रोफेसर एवं कार्डियक सर्जन डॉ. सुनीता
सर्जरी विभाग: एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्वेताभ प्रधान
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पूनम बिष्ट
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रीती शर्मा
हड्डी रोग विभाग: असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ईश्वर धर्मसक्तू
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कृष्ण देव यादव
न्यूरोसर्जन डॉ. अमित देवल (बेस अस्पताल से संबद्ध)
यह स्थिति चिकित्सा शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर रही है। मरीजों को सस्ते इलाज की बजाय दर्द और असुविधा मिल रही है। अधिकारियों को तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती और बेहतर कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ताकि कुमाऊं का यह प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र अपनी सेवाएं प्रभावी ढंग से चला सके।








