रुड़की : हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र में बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी सुपरवाइजर राखी सैनी को देहरादून स्थित सतर्कता (विजिलेंस) टीम ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई बुधवार, 25 मार्च 2026 को की गई। टीम ने रुड़की के बाल विकास अधिकारी कार्यालय (ग्रामीण द्वितीय) में छापेमारी कर सुपरवाइजर को रंगे हाथ दबोचा।
आरोप है कि सुपरवाइजर राखी सैनी ने एक आंगनबाड़ी सहायिका से उसके प्रमोशन के बदले 50 हजार रुपये की मांग की थी। सहायिका ने इसकी शिकायत सतर्कता विभाग में दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर विजिलेंस टीम ने पूरे मामले की पुष्टि की और जाल बिछाया। तय योजना के तहत जब सहायिका ने रिश्वत की राशि सुपरवाइजर को सौंपी, तुरंत टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
शिकायत की पृष्ठभूमि और विजिलेंस की भूमिका
देहरादून से विशेष टीम रुड़की पहुंची थी। टीम ने बाल विकास अधिकारी कार्यालय में अचानक छापा मारा और पूरे परिसर की तलाशी ली। सूत्रों के अनुसार, आंगनबाड़ी सहायिका ने प्रमोशन के लिए लंबे समय से प्रयास कर रही थीं। सुपरवाइजर ने प्रमोशन सुनिश्चित करने के एवज में 50 हजार रुपये की राशि मांगी। सहायिका ने इस अनैतिक मांग को सहन न करते हुए तुरंत सतर्कता विभाग को सूचित किया।

विजिलेंस टीम ने शिकायत की प्रामाणिकता जांचने के बाद पूरे ऑपरेशन को प्लान किया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका था। छापेमारी के दौरान रिश्वत की पूरी रकम बरामद की गई, जिसे अब सबूत के रूप में रखा गया है।
आरोपी सुपरवाइजर की भूमिका और आगे की जांच
सुपरवाइजर राखी सैनी ग्रामीण द्वितीय क्षेत्र में तैनात हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि उन्होंने आंगनबाड़ी सहायिका को प्रमोशन का झांसा देकर रिश्वत मांगी। इस मामले में विकास भवन रोशनाबाद स्थित डीपीओ कार्यालय के एक अधिकारी का नाम भी सामने आया है। विजिलेंस टीम अब उनकी भूमिका की भी गहन जांच कर रही है।
सतर्कता विभाग के अधिकारी ने बताया कि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। यदि अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी सुपरवाइजर को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।
विभागीय स्तर पर मचा हड़कंप
इस छापेमारी के बाद बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। रुड़की सहित आसपास के क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों में काम करने वाले कर्मचारियों में खौफ का माहौल है। कई कर्मचारी अब अपनी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस घटना से प्रमोशन और पोस्टिंग से जुड़ी सारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
उत्तराखंड सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। ऐसे मामलों में सतर्कता विभाग लगातार सक्रिय है।
आंगनबाड़ी व्यवस्था में भ्रष्टाचार का असर
आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का अहम हिस्सा हैं। लाखों महिलाएं इन केंद्रों में सहायिका और कार्यकर्ता के रूप में काम करती हैं। प्रमोशन की प्रक्रिया में अगर रिश्वतखोरी होती है तो इसका सीधा असर सेवा वितरण पर पड़ता है।

यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने का जिम्मा सौंपा गया है। यदि सुपरवाइजर स्तर पर ही भ्रष्टाचार पनपता है तो योजनाओं का लाभ जरूरतमंद तक नहीं पहुंच पाता।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता विभाग का अभियान
उत्तराखंड सतर्कता विभाग पिछले कुछ वर्षों से विभागीय स्तर पर बड़े-बड़े घोटालों पर नकेल कस रहा है। रुड़की का यह मामला उसी अभियान का हिस्सा है। विभाग के अधिकारी लगातार शिकायतों पर नजर रखते हैं और ट्रैप ऑपरेशन के जरिए दोषियों को पकड़ते हैं।
सरकार की ओर से कर्मचारियों को सतर्कता प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे भ्रष्टाचार से दूर रहें। साथ ही, आम नागरिकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे किसी भी तरह की रिश्वत की मांग होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।












