देहरादून : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उत्तराखंड में शिया समुदाय में गहरा शोक व्याप्त है। 28 फरवरी 2026 को तेहरान में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई है, जिसके बाद ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।
देहरादून सहित उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में शिया समुदाय के लोगों ने शोक सभाएं आयोजित कीं और विरोध प्रदर्शन किए। देहरादून में तीन दिनों का शोक मनाया जा रहा है। शाम को कैंडल मार्च निकाला गया और रात में विरोध जताया गया। ईसी रोड स्थित मस्जिद में दोपहर की नमाज के बाद शोक जताया गया, जिसमें अंजुमन मोइनुल मोमीनीन के पदाधिकारी शामिल हुए। रात की नमाज के बाद मजलिस में खामेनेई को हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की तरह शहीद बताया गया, जिन्होंने यजीद के सामने कभी नहीं झुके और रोजे की हालत में बलिदान हुआ। समुदाय ने इसे आशूरा जैसा दुखद दिन करार दिया।
इस मौके पर अंजुमन मोइनुल मोमीनीन के अध्यक्ष कल्बे हैदर जैदी, महासचिव सिकंदर नकवी, उपाध्यक्ष सैय्यद अली, कोषाध्यक्ष जिल्ले हसनैन अफजल मेहंदी, फिरोज हैदर जैदी, अफसर हुसैन नकवी, नईम और जान जैदी सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
आल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रदेश अध्यक्ष और नाएब शहर काजी (अहले सुन्नत) पीर सैयद अशरफ हुसैन कादरी ने भी खामेनेई की मौत को पूरी इस्लामी मिल्लत के लिए बड़ा दुख बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल लंबे समय से खामेनेई को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे ताकि ईरान की सत्ता पर कब्जा कर सकें। इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार देते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि अरब देशों और ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने की तत्काल व्यवस्था की जाए। साथ ही प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने और कानून हाथ में न लेने की अपील की।









