हरियाणा : आस्था और भक्ति का अनोखा संगम श्री झण्डा जी मेला की तैयारियां उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में तेजी से चल रही हैं। इस पावन आयोजन की शुरुआत 8 मार्च 2026 को दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज परिसर में श्री झण्डे जी के भव्य आरोहण के साथ होगी।
हरियाणा के अराईयांवाला में शुक्रवार को हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में श्री झण्डे जी का विधिवत ध्वजारोहण संपन्न हुआ। श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज के नेतृत्व में 100 सदस्यीय जत्था देहरादून से रवाना होकर दोपहर 12:10 बजे वहां पहुंचा। परंपरा के अनुसार पुराने ध्वज को पूर्ण सम्मान के साथ उतारा गया, फिर दूध, दही, घी, मक्खन, गंगाजल और पंचगव्य से स्नान कराकर 60 फीट ऊंचे नए श्री झण्डे जी का आरोहण किया गया।

इस दौरान जयकारों और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा, श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नतमस्तक हुए। कार्यक्रम के बाद प्रसाद और लंगर का वितरण किया गया, जिसमें अपार संख्या में संगत ने हिस्सा लिया।
श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज ने मेला संचालन कमेटी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि यह आयोजन सुचारु और भव्य रूप से संपन्न हो। श्री झण्डा जी गुरु परंपरा की अखंड ज्योति, त्याग, सेवा और मानवता के प्रतीक हैं। यह मेला प्रेम, भाईचारे और समरसता के संदेश को फैलाने का माध्यम बनता है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आकर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
परंपरा अनुसार, पैदल संगत की यात्रा जारी है। 28 फरवरी को सहसपुर के श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल में उनका स्वागत होगा, जबकि 1 मार्च को संगत देहरादून में प्रवेश करेगी। कांवली गांव में भव्य स्वागत, पुष्पवर्षा, बैंड-बाजे और जयकारों के साथ अभिनंदन होगा। इसके बाद श्री दरबार साहिब में प्रवेश, आशीर्वाद और विशेष अरदास का आयोजन होगा।

मेला अधिकारी विजय गुलाटी ने बताया कि दरबार परिसर को आकर्षक लाइटिंग, फूलों की सजावट, भव्य द्वारों से सजाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था पुख्ता की गई है। होली के बाद संगतों का प्रवाह बढ़ेगा, और पूरा देहरादून भक्ति के रंग में रंग जाएगा। 7 मार्च को पूरब की संगत की विदाई होगी, जबकि 8 मार्च को श्री झण्डे जी का आरोहण मेले का शुभारंभ करेगा।
यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा भाव और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। आगामी दिनों में यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उत्सव साबित होगा।









