देहरादून : देवभूमि देहरादून आज गुरु महिमा और श्रद्धा के रंगों से रंगी हुई नजर आ रही है। श्री गुरु राम राय जी महाराज के पावन दरबार साहिब में श्री झंडा जी मेला 2026 पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित हो रहा है। यह मेला सिखों के सातवें गुरु श्री गुरु हर राय जी के बड़े पुत्र श्री गुरु राम राय जी महाराज की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने देहरादून को अपनी तपस्थली बनाया और यहां विशाल ध्वज (झंडा जी) की परंपरा शुरू की।

मुख्य आकर्षण: श्री झंडे जी का भव्य आरोहण
रविवार (08 मार्च 2026) को सुबह 7 बजे से श्री झंडे जी को उतारने की पवित्र प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद वैदिक विधि-विधान से ध्वजदंड का दूध, दही, घी, मक्खन, गंगाजल और पंचगव्य से स्नान कराया गया। संगतों की उपस्थिति में पूजा-अर्चना और अरदास के बाद गिलाफ चढ़ाने का कार्य सुबह 10 बजे से शुरू हुआ।
दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज की अगुवाई में 94 फीट ऊंचे श्री झंडे जी का विधिवत आरोहण किया जाएगा। यह क्षण मेले का सबसे प्रमुख आकर्षण है, जिसमें लाखों श्रद्धालु साक्षी बनते हैं और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
गुरु मंत्र प्रदान और संगतों की भावुकता
मेले की पूर्व संध्या पर शनिवार को श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने हजारों संगतों को गुरु मंत्र प्रदान किया। मंत्र प्राप्त कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और स्वयं को धन्य मानने लगे। महाराज जी ने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि गुरु सूर्य की तरह सभी पर समान कृपा बरसाते हैं और अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से दूर करते हैं।

लाइव प्रसारण और अन्य व्यवस्थाएं
विशाल भीड़ को ध्यान में रखते हुए परिसर में 5 एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं, जहां सभी अनुष्ठानों का सीधा प्रसारण हो रहा है। साथ ही फेसबुक और यूट्यूब पर भी लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध है। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा जैविक उत्पादों के स्टॉल भी लगाए गए हैं।
स्वास्थ्य और सेवा
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की मेडिकल टीम 24 घंटे तैनात है, निःशुल्क दवाइयां और एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध है। 6, 7 और 9 मार्च को स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में अब तक 150 यूनिट से अधिक रक्तदान हो चुका है।
आगामी कार्यक्रम
10 मार्च: ऐतिहासिक नगर परिक्रमा
मेला 27 मार्च तक चलेगा, जिसमें विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां जारी रहेंगी।
ऐतिहासिक महत्व
श्री गुरु राम राय जी महाराज का जन्म 1646 में कीरतपुर (पंजाब) में हुआ था। उन्होंने देहरादून में लोक कल्याण के लिए ध्वज स्थापित किया। हर वर्ष चैत्र शुक्ल पंचमी (होली के पांचवें दिन) को उनके जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है और इसी अवसर पर झंडा जी मेला लगता है।
पूर्वी संगतों को पगड़ी, ताबीज और प्रसाद देकर सम्मानपूर्वक विदा किया गया। पूरा परिसर जयकारों, भजन, कीर्तन और सेवा से गूंज रहा है।









