संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश किया। बजट में पहाड़ी राज्यों के लिए इको-टूरिज्म और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की घोषणाओं ने उत्तराखंड को नई संभावनाओं की ओर संकेत दिया है।
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर सहित देश के चुनिंदा पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण के अनुकूल माउंटेन ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित करना है। उत्तराखंड में इन माउंटेन ट्रेल्स से बाइकिंग और एडवेंचर टूरिज्म को खास तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा सरकार ने मेडिकल टूरिज्म को नई ऊंचाई देने के लिए पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने की घोषणा की है। इनमें निजी क्षेत्र की भागीदारी से हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स विकसित किए जाएंगे, जिनमें आयुष केंद्र, आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं, पोस्ट केयर और रिहैबिलिटेशन सेंटर शामिल होंगे। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुलने की संभावना है।
बजट में भारत की प्राचीन योग और आयुर्वेद परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने पर भी जोर दिया गया है। सरकार तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान स्थापित करेगी। उत्तराखंड को इसका लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि राज्य सरकार पहले ही गुरुकुल क्षेत्र में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र को भेज चुकी है।
हालांकि, केंद्रीय बजट से उत्तराखंड को जिन बड़े ऐलानों की उम्मीद थी, वे पूरी तरह साकार नहीं हो सकीं। आगामी महाकुंभ को देखते हुए प्रदेश में बड़े स्तर पर अवस्थापना विकास, जल विद्युत परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना और लघु उद्योगों को लेकर ठोस पैकेज की अपेक्षा थी, लेकिन बजट में इन मुद्दों पर स्पष्ट घोषणाएं नहीं हो पाईं।
कुल मिलाकर बजट ने उत्तराखंड के लिए टूरिज्म और हेल्थ सेक्टर में अवसरों के दरवाजे तो खोले हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे और उद्योगों को लेकर उम्मीदें अभी अधूरी नजर आ रही हैं।










