उधमसिंह नगर :उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के नानकमत्ता क्षेत्र में शनिवार को हुई एक चौंकाने वाली घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। POCSO एक्ट के तहत आरोपी युवक को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस की दबिश के दौरान 80 वर्षीय वृद्धा सुखदेव कौर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों की धक्का-मुक्की और अभद्रता के कारण बुजुर्ग महिला गिर गईं और उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजन और ग्रामीणों ने शव को नानकमत्ता कोतवाली गेट पर रखकर तीन घंटे तक धरना दिया, जिससे पूरे इलाके में तनाव व्याप्त रहा।
घटना की पूरी कहानी: क्या हुआ था नानकमत्ता में?
परिजनों के मुताबिक, पुलिस दबिश का मकसद POCSO एक्ट के आरोपी कुलदीप सिंह उर्फ बंटी को गिरफ्तार करना था। परिवार ने पहले ही किशोरी को बरामद कर पुलिस को सौंप दिया था और आरोपी को घर से बेदखल भी कर दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने सादे कपड़ों में तीन-चार जवान लेकर दोपहर करीब 1:30 बजे सिद्धा नवदिया गांव पहुंची।
लखविंदर सिंह (मृतका के पोते) ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके घर पर दादी सुखदेव कौर, बहन पूजा कौर और 10 वर्षीय भाई लवजोत सिंह मौजूद थे। पुलिसकर्मियों ने बहन से आरोपी के बारे में पूछताछ शुरू की। इसी दौरान बुजुर्ग दादी बाहर आईं तो पुलिसवालों ने तेज आवाज में धमकाना और धक्का-मुक्की शुरू कर दी। लखविंदर का आरोप है कि धक्का लगने से सुखदेव कौर गिर गईं। पुलिसकर्मी उन्हें नाटक करने का आरोप लगाते रहे और करीब 15 मिनट तक अस्पताल ले जाने में देरी की। जब उन्हें नानकमत्ता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का गुस्सा फूटा: शव रखकर 3 घंटे धरना, कोतवाली गेट बंद
मौत की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण भड़क उठे। उन्होंने शव को उठाकर सीधे नानकमत्ता कोतवाली गेट पर रख दिया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब तीन घंटे तक चले इस हंगामे के दौरान परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जिस किशोरी को भगाने का आरोप था, उसे वे पहले ही पुलिस को सौंप चुके थे। फिर भी बिना जरूरी कारण के दबिश दी गई। स्थिति बिगड़ने पर कोतवाली गेट बंद कर दिया गया और आसपास के थानों (किच्छा, सितारगंज, खटीमा, पुलभट्टा) से अतिरिक्त पुलिस और PAC बुलाई गई।
पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई: SSP ने 4 कर्मियों को सस्पेंड किया
देर शाम मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP ने तुरंत एक्शन लिया। दबिश में शामिल उप निरीक्षक सहित चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया। जांच की जिम्मेदारी एसपी सिटी को सौंप दी गई है। सीओ सितारगंज बीएस धौनी (भूपेंद्र सिंह धौनी) ने परिजनों को विश्वास दिलाया कि पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराया जाएगा, उसकी पूरी वीडियोग्राफी होगी और रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधायक गोपाल सिंह राणा और एसओजी इंचार्ज ने कराई वार्ता
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय विधायक गोपाल सिंह राणा मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से सीधी बातचीत की और पुलिस अधिकारियों से भी चर्चा की। एसओजी इंचार्ज उमेश कुमार (पूर्व में नानकमत्ता के एसओ) ने भी प्रदर्शनकारियों को समझाया और अधिकारियों के साथ समन्वय कराया। उनकी कोशिशों से आखिरकार परिजन पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार हो गए।
POCSO एक्ट और पुलिस दबिश के नियम: क्या कहता है कानून?
POCSO एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) बच्चों के यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया सख्त कानून है। लेकिन कई बार पुलिस की दबिश में अनावश्यक बल प्रयोग और अभद्रता की शिकायतें आती रहती हैं। उत्तराखंड पुलिस के नियमों के मुताबिक दबिश के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार जरूरी है। इस मामले में परिजनों का आरोप है कि इन नियमों की अनदेखी की गई।
इलाके में बढ़ता आक्रोश: क्या पुलिस सुधार की जरूरत?
नानकमत्ता सहित आसपास के इलाकों में इस घटना ने पुलिस पर भरोसा टूटने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर परिवार पहले ही किशोरी को पुलिस को सौंप चुका था तो फिर बिना सूचना के दबिश क्यों दी गई? इस तरह की घटनाएं पुलिस-जनता के रिश्ते को खराब करती हैं।
पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही असली कारण सामने आएगा। फिलहाल पूरे मामले पर नजर टिकी हुई है।












