रिपोर्ट : आरव सिंह
हस्तक्षेप desk
रुद्रप्रयाग : रुद्रप्रयाग जिले में नशे की बढ़ती समस्या और शराब की अवैध बिक्री को लेकर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। जहां एक तरफ धामी सरकार नई शराब दुकानें खोलने की तैयारी कर रही है, वहीं त्रियुगीनारायण गांव की महिलाओं ने नशा मुक्ति के लिए बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। इन महिलाओं ने 12 किलोमीटर लंबी पैदल रैली निकालकर पूरे क्षेत्र में जनजागरूकता का संदेश दिया। यह रैली न केवल नशे के खिलाफ आवाज बनी, बल्कि केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अवैध शराब की बिक्री को लेकर प्रशासन पर दबाव भी बनाती दिख रही है।
नशा मुक्ति के लिए महिलाओं का ऐतिहासिक संघर्ष
त्रियुगीनारायण गांव की महिलाएं लंबे समय से नशे के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने संगठित होकर त्रियुगीनारायण से सोनप्रयाग तक 12 किलोमीटर की पैदल रैली निकाली। रैली में शामिल हर महिला के हाथ में नशा मुक्ति की तख्तियां थीं और पूरे रास्ते नशे के खिलाफ जोरदार नारे गूंजते रहे। महिलाओं का उत्साह देखकर लग रहा था कि अब नशे की इस बुराई को जड़ से खत्म करने का समय आ गया है।

रैली के दौरान महिलाओं ने रास्ते में मिलने वाले लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया। खासतौर पर युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहने की अपील की गई। गांव-गांव से आई महिलाओं ने एकजुटता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नशा मुक्त समाज बनाना सामूहिक प्रयास से ही संभव है। इस रैली ने पूरे रुद्रप्रयाग जिले में नशा विरोधी आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की है।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अवैध शराब की बिक्री पर चिंता
सोनप्रयाग पहुंचकर महिलाओं ने केदारनाथ यात्रा के प्रमुख पड़ाव पर अवैध शराब की खुलेआम बिक्री को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालु त्रियुगीनारायण भी आते हैं। ऐसे में यात्रा मार्ग पर शराब की बिक्री न केवल तीर्थयात्रियों की आस्था को ठेस पहुंचाती है, बल्कि पूरे क्षेत्र का माहौल भी बिगाड़ती है।
महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले इस दिशा में सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने अवैध शराब की बिक्री पर रोक नहीं लगाई तो वे और बड़ा आंदोलन करने को तैयार हैं। सोनप्रयाग में रैली खत्म होने के बाद महिलाओं ने एक बैठक भी की जिसमें यात्रा मार्ग को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया।
नशे के सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभाव: महिलाओं की अपील
विशेष रूप से रैली में शामिल विशेश्वरी देवी भट्ट ने कहा, “नशा केवल एक व्यक्ति का स्वास्थ्य नहीं बिगाड़ता, बल्कि पूरा परिवार और समाज को कमजोर कर देता है।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे की लत से बचें और सही रास्ते पर चलें। महिलाओं ने सभी से आह्वान किया कि नशा मुक्ति अभियान में हर कोई अपना योगदान दे।
रैली में शामिल महिलाओं ने यह भी बताया कि नशे की वजह से कितने परिवार बिखर चुके हैं, कितने युवा बेरोजगार हो गए हैं और कितनी महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि धामी सरकार की नई शराब दुकानों की नीति इस समस्या को और बढ़ावा दे रही है। महिलाओं का कहना है कि सरकार को पहले नशा मुक्ति पर ध्यान देना चाहिए, न कि नई दुकानें खोलने पर।
महिलाओं का संकल्प: लगातार जागरूकता अभियान चलेगा
रैली के बाद महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगी। स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में नशे के खिलाफ सभाएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का फैसला किया।
यह रैली सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में नशा विरोधी आंदोलन की शुरुआत है। महिलाओं का यह संघर्ष दिखाता है कि जब समाज की माताएं बहनें एकजुट हो जाती हैं तो कोई भी बुराई टिक नहीं सकती। प्रशासन और सरकार को अब इन महिलाओं की आवाज सुननी होगी।
त्रियुगीनारायण की इन महिलाओं ने साबित कर दिया कि नशे के खिलाफ लड़ाई कोई अकेले की नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। केदारनाथ यात्रा से पहले यह रैली एक बड़ी चेतावनी है। यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो महिलाओं का आंदोलन और तेज होगा।
उत्तराखंड सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। नशा मुक्त समाज बनाने के लिए महिलाओं का यह प्रयास सराहनीय है। आशा है कि 22 अप्रैल से शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा नशा मुक्त मार्ग पर चलेगी और तीर्थयात्री बिना किसी चिंता के दर्शन कर सकेंगे।










