उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों और कुछ निजी औद्योगिक इकाइयों पर कुल 104.57 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिल सार्वजनिक कर दिए हैं। यह आंकड़ा 2 मार्च 2026 तक की स्थिति पर आधारित है। यूपीसीएल ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बकाएदारों की विस्तृत सूची अपलोड कर दी है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जल्द से जल्द भुगतान हो सके।
सबसे बड़ा बकाया अल्मोड़ा जिले में जल संस्थान के एक खाते पर है, जहां 10.34 करोड़ रुपये लंबित हैं। इसी तरह पेयजल निगम और लघु डाल नहर खंड जैसे विभाग भी बड़ी राशि के बकाएदार हैं। चिकित्सा शिक्षा के सोबन सिंह जीना मेडिकल कॉलेज पर 14.64 लाख रुपये का बिल बाकी है। टिहरी में पेयजल निगम पर 4.52 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया दर्ज है, जबकि गंगा प्रदूषण नियंत्रण प्रोजेक्ट पर भी एक करोड़ रुपये से ज्यादा राशि लंबित है।
हरिद्वार जिले में ज्वालापुर डिवीजन के प्रोजेक्ट मैनेजर (मैकेनिकल) सी एड एमएम यूनिट (गंगा) पर 4.49 करोड़ रुपये और एक अन्य परियोजना प्रबंधक पर 2.16 करोड़ रुपये का बड़ा बकाया है। यहां ट्यूबवेल योजनाओं (रसूलपुर, लालढांग आदि) पर भी लाखों रुपये के बिल पेंडिंग हैं। रुड़की में एक निजी औद्योगिक इकाई सबसे बड़ी बकाएदार है, जिस पर 3.75 करोड़ रुपये बकाया है।
राजधानी देहरादून में जलकल अभियंता के विभिन्न खातों पर करोड़ों का बकाया है, जिसमें एक खाते पर ही 1.63 करोड़ रुपये से अधिक शामिल हैं। नैनीताल के नलकूप खंड पर 44.78 लाख रुपये, चंपावत में ईई नलकूप खंड के कई खातों पर लाखों रुपये, और बड़कोट में जल संस्थान पर 25.90 लाख रुपये का बकाया है।
यूपीसीएल ने सख्त चेतावनी जारी की है कि यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में इन विभागों और इकाइयों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। निगम ने कहा है कि अगली समीक्षा रिपोर्ट अप्रैल 2026 के पहले सप्ताह में जारी की जाएगी, जिसमें प्रगति की समीक्षा होगी।
यह कदम यूपीसीएल की वित्तीय मजबूती और बकाया वसूली अभियान का हिस्सा है, क्योंकि सरकारी विभागों की ओर से समय पर भुगतान न होने से निगम को आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है









