देहरादून : उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संघ ने निगम में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। संघ का दावा है कि कुल 20 से 25 करोड़ रुपये तक के विभिन्न घोटाले सामने आए हैं, जबकि छोटे कर्मचारियों को उत्पीड़न का शिकार बनाया जा रहा है और बड़े अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
संघ के अध्यक्ष टीएस बिष्ट ने मंगलवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य गठन के समय परिसंपत्ति समायोजन में लगभग 2.18 करोड़ रुपये की अनियमितता पाई गई, जिसे वसूली के बजाय बट्टे खाते में डाल दिया गया। वहीं, एक छोटे कर्मचारी से 55 हजार रुपये से अधिक की वसूली की गई, जो दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
संघ ने विभिन्न क्षेत्रों में हुए कथित घोटालों का ब्योरा देते हुए आरोप लगाया:
लालकुआं डिपो संख्या 4 और 5 में 10 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता
हरिद्वार खनन प्रभाग में 1.22 करोड़ रुपये
विभिन्न गेटों पर 57 लाख रुपये
पश्चिमी क्षेत्र रामनगर में 1.11 करोड़ रुपये
टोंस लॉगिंग प्रभाग में लगभग 8 करोड़ रुपये
इसके अलावा, खनन क्षेत्रों में आरएफआईडी और सीसीटीवी की अनिवार्यता के बावजूद वाहनों का संचालन बिना इनके हो रहा है, जो नियमों की खुली अनदेखी है। संघ ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को निलंबित करने और स्थानांतरित करने का भी आरोप लगाया है।
संघ ने राज्य शासन से मांग की है कि सभी आरोपों की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी उच्चाधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और कर्मचारियों पर हो रहे उत्पीड़न को तुरंत रोका जाए।








