उत्तरकाशी : उत्तरकाशी जिले के मोरी विकास खंड के सुदूर फिताड़ी गांव में सोमवार देर रात एक भयावह आग ने पूरे गांव को हिलाकर रख दिया। शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी इस आग ने मात्र कुछ घंटों में 14 आवासीय भवनों को पूरी तरह भस्म कर दिया। साथ ही घरों के पास बनी गोशाला में बंधे 3 गायें और 2 भेड़ें भी जलकर राख हो गईं। परिवार के सदस्य किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकल पाए, लेकिन उनकी सारी जमा-पूंजी आग की भेंट चढ़ गई।

यह घटना उत्तरकाशी जिले की उन दूरस्थ पहाड़ी बस्तियों की सच्चाई को उजागर करती है जहां बिजली की पुरानी लाइनें, संकरी सड़कें और सीमित संसाधन आपदा के समय बचाव कार्य को और भी चुनौतीपूर्ण बना देते हैं।
घटना का क्रम: कैसे फैली आग पूरे गांव में
सोमवार रात करीब 10 बजे फिताड़ी गांव के प्रेम सिंह पुत्र मोर सिंह के पांच मंजिला आवासीय मकान में अचानक शॉर्ट सर्किट से आग भड़क उठी। आग की लपटें तेजी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंचीं। परिवार के सदस्य चीखते-चिल्लाते बाहर निकले। ग्रामीण जब तक समझ पाते, आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आस-पास के 13 अन्य मकानों को अपनी चपेट में ले लिया।
चार घंटे तक आग धधकती रही। आसपास के गांवों—रेकचा, कासला, हरपूरी, धारा, जखोल और साऊणी—के ग्रामीण आग बुझाने के लिए दौड़ पड़े। बिना किसी आधुनिक उपकरण के लोग बाल्टियां, पानी के टैंकर और अपनी मेहनत से आग पर काबू पाने की कोशिश करते रहे। आखिरकार चार घंटे की लगातार मशक्कत के बाद सुबह तक आग पर काबू पाया जा सका।
कितना नुकसान हुआ? प्रभावित परिवारों की सूची
आग ने पूरे 14 मकानों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। जिन परिवारों के घर जल गए उनमें शामिल हैं:
प्रेम सिंह पुत्र मोर सिंह
कुंदन सिंह पुत्र खेम सिंह
रविन्द्र सिंह पुत्र मोरी सिंह
उमशाल सिंह पुत्र मोर सिंह
तिलक सिंह पुत्र मोर सिंह
नोनियाल सिंह पुत्र गंगा सिंह
ताजम देई पत्नी नोनियाल सिंह
दुदकली देवी पत्नी नोनियाल सिंह
विरेन्द्र सिंह पुत्र हाकम सिंह
सुविंद्र पत्नी सुरेन्द्र सिंह
मोहन सिंह पुत्र धुंधर सिंह
जनक सिंह पुत्र तोता राम
इसके अलावा कई परिवारों के अन्न भंडार, राशन, कपड़े, बर्तन और अन्य घरेलू सामान भी पूरी तरह जलकर राख हो गए। गोशाला में बंधे 5 मवेशी—3 गायें और 2 भेड़ें—भी नहीं बच सकीं।
अधिकारियों ने तुरंत लिया संज्ञान, मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और प्रमुख रणदेव राणा तुरंत फिताड़ी पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से बात की और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने घटना को “बेहद दुखद” बताते हुए आपदा प्रबंधन सचिव और डीएम को त्वरित राहत-बचाव कार्य शुरू करने के सख्त निर्देश दिए। टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने भी अपने ट्वीट और बयान में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और जिला प्रशासन को प्रभावी राहत कार्य चलाने का निर्देश दिया।
राहत कार्य: एसडीएम ने बांटी सहायता
एसडीएम पुरोला मुकेश रमोला और राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर हर प्रभावित परिवार को तुरंत 5,000 रुपये नकद, राशन किट, टेंट और बर्तन वितरित किए। पीड़ित परिवार फिलहाल पड़ोसियों के घरों में शरण लिए हुए हैं। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम अभी भी मौके पर तैनात है और बचाव व सर्वे का काम जारी है।
फायर ब्रिगेड क्यों नहीं पहुंच पाई? सड़क की समस्या बनी बड़ी बाधा
मोरी विकास खंड मुख्यालय से मात्र 60 किलोमीटर दूर स्थित फिताड़ी तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकी। निर्माणाधीन मोटर मार्ग पर दलदल और खराब सड़क की वजह से भारी वाहन अटक गए। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में आपदा प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर कर दिया है।
आगे क्या? पीड़ित परिवारों को स्थायी राहत की जरूरत
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पक्के मकानों के निर्माण के लिए भी सहायता दी जाएगी। साथ ही बिजली विभाग को गांव की पुरानी लाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
फिताड़ी गांव की यह घटना केवल एक आग की खबर नहीं, बल्कि उत्तराखंड के दूरदराज के गांवों में बिजली, सड़क और अग्निशमन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत का सबक भी है।











