उत्तराखंड : जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण (डीडीए), टिहरी ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए सहायक अभियंता पंकज पाठक को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय से अटैच कर दिया है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह द्वारा जारी इस आदेश में निर्णय को “प्रशासनिक एवं कार्यहित” में लिया गया बताया गया है।
इस आदेश के साथ ही वर्ष 2024 और 2025 के दौरान जारी पूर्व प्रतिनियुक्ति आदेशों को भी निरस्त कर दिया गया है। अब पंकज पाठक को अग्रिम आदेशों तक डीडीए टिहरी के मुख्यालय कार्यालय में संबद्ध किया गया है।
आदेश का महत्व और पृष्ठभूमि
यह कार्रवाई स्थानीय प्रशासनिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बन गई है। सहायक अभियंता पंकज पाठक पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न विकास कार्यों और परियोजनाओं से जुड़े रहने के कारण सुर्खियों में रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान नागरिकों, स्थानीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार उनके विरुद्ध विरोध प्रदर्शन और शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
हालांकि आदेश में संबद्धीकरण का कोई विस्तृत कारण नहीं बताया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि विभागीय स्तर पर कुछ मामलों की जांच प्रक्रिया चल रही है। इस कदम को उसी जांच से जोड़कर देखा जा रहा है। प्राधिकरण की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक पुष्टि या स्पष्टीकरण को जारी नहीं किया गया है।
प्रशासनिक संबद्धीकरण की प्रक्रिया
प्रशासनिक संबद्धीकरण (Attachment) सरकारी विभागों में एक सामान्य प्रक्रिया है। इसे आमतौर पर निम्नलिखित उद्देश्यों से किया जाता है:
सुचारू कार्य संचालन सुनिश्चित करना
संवेदनशील मामलों की जांच के दौरान तटस्थता बनाए रखना
कर्मचारी के प्रदर्शन की समीक्षा करना
विभागीय अनुशासन बनाए रखना
डीडीए टिहरी जैसे विकास प्राधिकरण में जहां बड़े पैमाने पर निर्माण, भूमि उपयोग और विकास परियोजनाएं चलती हैं, वहां ऐसे फैसले अक्सर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाते हैं।
स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं
स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इस आदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ इसे सामान्य प्रशासनिक रोटेशन मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे संभावित विभागीय जांच से जोड़कर देख रहे हैं।
पंकज पाठक के कार्यकाल से जुड़ी पुरानी शिकायतों में मुख्य रूप से विकास कार्यों में देरी, अनियमितताओं और नागरिक सेवाओं से संबंधित मुद्दे शामिल रहे हैं। हालांकि इन शिकायतों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
डीडीए टिहरी के इस कदम को विकास कार्यों की बेहतर निगरानी और जवाबदेही की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी प्रशासन की नींव रखते हैं।








