किसान मंच ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि यह सरकार की घोर उदासीनता और भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश है। मंच ने मांग की है कि मुख्यमंत्री तत्काल इस्तीफा दें और लोकायुक्त की नियुक्ति की जाए।
अन्ना आंदोलन से उठी थी मांग
देश में 2011 के अन्ना आंदोलन के बाद हर राज्य में लोकायुक्त की मांग तेज हुई थी। इसके दबाव में उत्तराखंड सरकार ने 26 जनवरी 2014 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर लोकायुक्त कानून लागू किया। जनता को उम्मीद थी कि इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
लेकिन हकीकत यह है कि भवन निर्माण, ढांचा और कर्मचारियों पर अरबों रुपये खर्च करने के बावजूद लोकायुक्त आज तक नियुक्त नहीं किया गया।
हाईकोर्ट के आदेश भी नजरअंदाज
नैनीताल हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई थी और सरकार को तत्काल लोकायुक्त की नियुक्ति करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान लोकायुक्त कार्यालय में तैनात सात अधिकारियों पर 1.88 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें केवल महंगाई भत्ते पर ही लगभग 6 लाख रुपये खर्च हुए।
“भ्रष्टाचार रोकने वाला ही विभाग भ्रष्टाचार का शिकार”
किसान मंच ने आरोप लगाया कि न्यायालय ने बिना कार्य वाले कर्मचारियों को हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने इसके विपरीत छोटे कर्मचारियों को हटाकर बड़े अधिकारियों को बरकरार रखा। मंच का कहना है कि यह साफ तौर पर जनता के टैक्स का दुरुपयोग है।
किसान मंच की मांगें
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मुख्यमंत्री तत्काल इस्तीफा दें
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लोकायुक्त की तुरंत नियुक्ति हो
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लोकायुक्त कार्यालय में हुए व्यर्थ खर्च की जांच हो
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दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार मंत्रियों पर कार्रवाई हो
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जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग रोका जाए