उत्तराखंड के राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है, खासकर गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों में। राज्य भर में प्रवक्ता के कुल 3670 पद खाली पड़े हैं, जिनमें से अधिकांश महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े हैं। नए शैक्षणिक सत्र (1 अप्रैल 2026 से) शुरू होने से पहले इन पदों को भरने की संभावना बहुत कम है।
मुख्य कारण और स्थिति
एलटी ग्रेड से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति का मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल में लंबित होने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है। इससे हजारों शिक्षकों की पदोन्नति अटकी पड़ी है। साथ ही, इस वर्ष नई भर्ती की कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है, हालांकि UKPSC ने दिसंबर 2025 में 808 प्रवक्ता पदों की भर्ती निकाली थी, लेकिन यह पूरी कमी को दूर नहीं कर पाएगी।
दूरस्थ पर्वतीय जिलों जैसे उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चंपावत और चमोली में रिक्तियां सबसे ज्यादा हैं, क्योंकि कई शिक्षक मैदानी इलाकों (देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल) में रहना पसंद करते हैं। यहां सुगम क्षेत्रों में पद अपेक्षाकृत कम खाली हैं। दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में विषय विशेषज्ञों की कमी पहले से ही गंभीर है, और यह छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर डाल सकती है।
अतिरिक्त चुनौतियां
अप्रैल 2026 में 814 एलटी और प्रवक्ता शिक्षक अपने मौजूदा स्कूलों से कार्यमुक्त होकर 186 अटल उत्कृष्ट विद्यालयों (CBSE संबद्ध) में स्थानांतरित होंगे। इससे दूर-दराज के स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बढ़ सकती है।
अतिथि शिक्षकों की स्थिति भी अनिश्चित है। हाल में 1346 एलटी शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति के बाद 205 अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जबकि पहले उन्हें अन्य स्कूलों में समायोजित करने का आश्वासन था। इससे नाराजगी बढ़ी है।
सरकार का रुख
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आश्वासन दिया है कि सरकार शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए गंभीर है। पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई भर्ती जल्द शुरू की जाएगी, ताकि विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
यह स्थिति उत्तराखंड के शिक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय है, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों के छात्रों के भविष्य को देखते हुए। उम्मीद है कि जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।








