विकास नगर देहरादून : उत्तराखंड देहरादून के विकासनगर जलालिया जंगल में सोमवार सुबह एक युवक का शव पेड़ से लटका हुआ मिला। स्थानीय लोगों ने जब सूचना दी तो चौकी प्रभारी संदीप पंवार अपने फोर्स के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। मौके पर देखा गया कि बगीचे के किनारे एक बड़े पेड़ की डाल पर डोरी के सहारे युवक का शव लटक रहा था। आसपास का इलाका घना जंगल है और आमतौर पर कम लोग आते-जाते हैं।
पुलिस ने शव को सावधानी से नीचे उतारा। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि युवक ने खुद फांसी लगाई लगती है, लेकिन संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। शव के पास कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, जिससे जांच और भी जटिल हो गई है। मौके से मोबाइल फोन बरामद किया गया जो रविवार दोपहर से स्विच ऑफ था।
मृतक सादिक की पहचान और परिवार का दर्द
शव की जेब से मिले मोबाइल फोन के आधार पर पुलिस ने युवक की पहचान रुड़की निवासी सादिक (25 वर्ष) के रूप में की। परिजनों को सूचना दी गई तो वे सदमे में आ गए। परिवार ने बताया कि रविवार शाम घर में तीखा विवाद हुआ था। इसके बाद सादिक घर से निकल गया और तभी से उसका कोई अता-पता नहीं था। परिजन पूरे रात उसकी तलाश करते रहे लेकिन फोन बंद होने के कारण कोई सुराग नहीं मिल सका।
सादिक देहरादून में फॉल सीलिंग का काम करता था। वह रोजाना सुबह घर से निकलता और शाम को लौटता था। परिवार के अनुसार पिछले कुछ महीनों से वह काम के तनाव और आर्थिक दबाव में रह रहा था। विवाद किस बात को लेकर हुआ, इसकी सही जानकारी परिवार ने नहीं दी, लेकिन पड़ोसियों का कहना है कि छोटी-मोटी घरेलू बातों पर अक्सर बहस होती रहती थी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और जांच की दिशा
चौकी प्रभारी संदीप पंवार ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए हैं। डोरी, शव की स्थिति और आसपास के निशान देखकर प्रारंभिक रिपोर्ट में आत्महत्या की संभावना जताई गई है, लेकिन पुलिस किसी भी एंगल से जांच कर रही है।
मोबाइल फोन की कॉल लिस्ट, लोकेशन हिस्ट्री और आखिरी लोकेशन की जांच की जा रही है। परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ शुरू कर दी गई है। पुलिस ने इलाके के CCTV फुटेज और आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। अभी तक किसी हत्या की आशंका नहीं है, लेकिन संदिग्ध हालत को देखते हुए केस को गंभीरता से लिया जा रहा है।
सादिक का पेशेवर जीवन और युवाओं पर बढ़ता तनाव
सादिक पिछले दो साल से देहरादून में फॉल सीलिंग का काम कर रहा था। यह काम शारीरिक रूप से काफी थकान भरा होता है और कमाई भी अनियमित रहती है। उत्तराखंड में कई युवा ऐसे कामों में लगे हैं जहां स्थिर आय नहीं मिलती। विशेषज्ञों का कहना है कि बेरोजगारी, पारिवारिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी युवाओं को इस राह पर धकेल रही है।
जलालिया जंगल के आसपास के इलाके में पिछले कुछ वर्षों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। देहरादून और रुड़की क्षेत्र में युवा आबादी में तनाव, डिप्रेशन और आत्महत्या के मामले चिंताजनक रूप ले रहे हैं। सादिक का मामला भी इसी श्रेणी में आता दिख रहा है।











