सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार को देशभर में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में करीब चार साल बाद संशोधन किया है। पेट्रोल की कीमत औसतन ₹3.14 प्रति लीटर बढ़कर ₹97.91 तक पहुंच गई है, जबकि डीजल ₹3.11 प्रति लीटर महंगा होकर ₹90.78 प्रति लीटर हो गया है। नई दरें शुक्रवार रात 12 बजे से लागू हो चुकी हैं।
मूल्य वृद्धि का विस्तृत विवरण
नियमित पेट्रोल की कीमत ₹94.77 से बढ़कर ₹97.91 प्रति लीटर हो गई है। प्रीमियम पेट्रोल की कीमत भी ₹102-104 से बढ़कर ₹105.14-107.14 प्रति लीटर पहुंच गई है। इसी तरह नियमित डीजल ₹87.67 से ₹90.78 प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
देश के विभिन्न शहरों में स्थानीय टैक्स और VAT के आधार पर अंतिम कीमत में थोड़ा अंतर रह सकता है। तेल कंपनियां हर सुबह 6 बजे कीमतों की समीक्षा करती हैं और बदलाव लागू करती हैं।
कीमत बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में संकेत दिया था कि महंगे क्रूड ऑयल के कारण तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। कंपनियों का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा था।
मंत्री ने चेतावनी दी थी कि अगर खुदरा कीमतें नहीं बढ़ाई गईं तो एक तिमाही में घाटा 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोर मुद्रा ने इस फैसले को मजबूर किया।
उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि सीधे परिवहन, लॉजिस्टिक्स और कृषि क्षेत्र को प्रभावित करेगी। इससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने के कारण जरूरी वस्तुओं के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं। आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, खासकर मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां डीजल का उपयोग कृषि मशीनरी और ट्रांसपोर्ट के लिए ज्यादा होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी घाटे की भरपाई के लिए न्यूनतम है। सरकार ने पिछले वर्षों में एक्साइज ड्यूटी में कटौती के जरिए उपभोक्ताओं को राहत दी थी, लेकिन अब वैश्विक दबाव के आगे समायोजन जरूरी हो गया।
पेट्रोल-डीजल मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया
पेट्रोल और डीजल की अंतिम कीमत में क्रूड ऑयल की लागत, रिफाइनिंग खर्च, एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन, VAT और अन्य टैक्स शामिल होते हैं। कई राज्यों में VAT की दर अधिक होने से कीमतें ऊंची दिखती हैं। यही वजह है कि मूल क्रूड लागत से दाम लगभग दोगुने हो जाते हैं।
सरकार समय-समय पर कीमतों की समीक्षा करती रहती है। पिछले चार वर्षों में स्थिरता बनी रही थी, लेकिन वैश्विक बाजार की अस्थिरता ने इस बदलाव को आवश्यक बना दिया।









