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उत्तराखंड में काटे जायेंगे 19,170 पेड़, राज्य सरकार ने केंद्र से मांगी अनुमति

उत्तराखंड में काटे जायेंगे 19,170 पेड़, राज्य सरकार ने केंद्र से मांगी अनुमति
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देवभूमि उत्तराखंड के घने साल (Shorea robusta) जंगलों में एक खतरनाक कीट ने भारी तबाही मचा दी है। देहरादून वन प्रभाग के थानो, असरोरी और झाझरा रेंज में साल बोरर या होप्लो (Hoplocerambyx spinicornis) नामक कीट के लार्वा ने हजारों साल के पेड़ों को अंदर से खोखला कर दिया है।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से 19,170 प्रभावित साल के पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी है। साथ ही संक्रमण को पूरी तरह रोकने के लिए ट्री ट्रैप ऑपरेशन चलाने की भी मंजूरी ली जा रही है।

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साल बोरर कीट क्या है और कैसे फैल रहा है संक्रमण?

साल बोरर एक प्रकार का वुड-बोरिंग बीटल है। इसकी मादा साल के पेड़ की जड़ों और तने में अंडे देती है। लार्वा अंदर घुसकर xylem (जल-वाहिनी) को नष्ट कर देता है, जिससे पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगता है। ऊपरी शाखाएं सूख जाती हैं और अंत में पूरा पेड़ मर जाता है।

वन विभाग को जब संक्रमण की सूचना मिली तो तुरंत वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून के विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई। FRI की टीम ने विस्तृत सर्वे किया और पाया कि थानो, असरोरी और झाझरा रेंज में कुल 19,170 साल के पेड़ इस कीट के लार्वा से बुरी तरह प्रभावित हैं। कई पेड़ पूरी तरह सूख चुके हैं और अब इन्हें काटना ही संक्रमण रोकने का एकमात्र प्रभावी उपाय बचा है।

क्यों जरूरी है प्रभावित पेड़ों को काटना?

वन विशेषज्ञों के अनुसार, अगर संक्रमित पेड़ों को समय रहते नहीं हटाया गया तो कीट स्वस्थ पेड़ों में भी तेजी से फैल सकता है। एक संक्रमित पेड़ सैकड़ों अन्य पेड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए राज्य सरकार का मानना है कि कुछ पेड़ों की बलि देकर पूरे साल के जंगल को बचाया जा सकता है।

यह पहली बार नहीं है जब साल बोरर ने उत्तराखंड या देश के अन्य साल वाले क्षेत्रों में समस्या पैदा की है। पहले भी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में ऐसी महामारी देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्षों की भारी बारिश और जलवायु परिवर्तन ने इस कीट के प्रकोप को बढ़ावा दिया हो सकता है।

ट्री ट्रैप ऑपरेशन: कीट नियंत्रण की अनोखी रणनीति

केवल प्रभावित पेड़ काटने से काम नहीं चलेगा। मॉनसून के मौसम में वन विभाग ट्री ट्रैप ऑपरेशन चलाने की योजना बना रहा है। इस ऑपरेशन में कुछ स्वस्थ साल के पेड़ों को काटकर 4 फुट लंबे लट्ठों में बदला जाएगा। इन लट्ठों को बारिश के पानी में रखा जाएगा।

साल की लकड़ी की खुशबू कीटों को आकर्षित करती है। कीट लट्ठों पर आकर इकट्ठा हो जाते हैं, जिन्हें पकड़कर मिट्टी के तेल (केरोसिन) में डाल दिया जाएगा। इस तरीके से वयस्क कीटों को मारकर उनके प्रजनन चक्र को तोड़ा जा सकता है।

उत्तराखंड सरकार की जिम्मेदारी और अगले कदम

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट कहा कि यह कदम जंगलों की रक्षा के लिए उठाया जा रहा है, न कि किसी अन्य उद्देश्य से। केंद्र सरकार की अनुमति मिलते ही प्रभावित पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से काटा जाएगा और क्षेत्र को साफ किया जाएगा।

वन विभाग अब नए पौधरोपण की भी योजना बना रहा है ताकि कटाई के बाद जंगल की हरियाली बनी रहे। स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को साल जंगलों के महत्व और कीट नियंत्रण के बारे में बताया जाएगा।

साल जंगल क्यों महत्वपूर्ण हैं उत्तराखंड के लिए?

साल के पेड़ उत्तराखंड के वनों की रीढ़ हैं। ये न सिर्फ जैव विविधता को बनाए रखते हैं बल्कि मिट्टी का कटाव रोकते हैं, जल संरक्षण में मदद करते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा देते हैं। साल की लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होती है, जबकि जंगल वन्यजीवों का आश्रयस्थल हैं।

देहरादून जैसे क्षेत्र में घने साल के जंगल पर्यटन और पर्यावरण संतुलन दोनों के लिए जरूरी हैं। ऐसे में इस संकट को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने त्वरित कार्रवाई शुरू की है।

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