देहरादून : भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) का ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर शनिवार सुबह देशभक्ति और अनुशासन के अद्भुत दृश्य से गूंज उठा। “भारत माता तेरी कसम, तेरे रक्षक बनेंगे हम” की गूंज के बीच 481 जेंटलमैन कैडेट और 34 विदेशी कैडेट ने अंतिम पग पूरा कर भारतीय सेना व अपने-अपने देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में प्रवेश किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ली परेड की सलामी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में परेड की सलामी ली। सुबह 6:42 बजे मार्कर्स कॉल के साथ परेड का शुभारंभ हुआ। कंपनी सार्जेंट मेजर रक्षित यादव, पुनीत राठी, सौरव सिंह सिकरवार, अमित कुंतल, ध्रुव कौशिक और यशराज पांडे ने अपनी-अपनी पोजीशन संभाली।
सुबह 6:47 बजे एडवांस कॉल पर विशाल कुमार के नेतृत्व में कैडेटों ने पूरे अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ ड्रिल स्क्वायर पर कदम रखा। सटीक कदमताल, तनी हुई छातियों और चेहरों पर देशसेवा का संकल्प देखते ही बनता था। दर्शक दीर्घा में बैठे परिजन, गणमान्य अतिथि और सैन्य अधिकारी भावुक हो उठे।
अंतिम पग और हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा
परेड का सबसे भावुक क्षण वह था जब नव-निर्मित अधिकारियों ने ‘अंतिम पग’ पार किया। इसी दौरान भारतीय सेना के हेलीकॉप्टरों ने आसमान से पुष्पवर्षा की, जिसने पूरे समारोह को यादगार बना दिया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को सम्मानित किया गया
समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए।
प्रमुख पुरस्कार:
स्वॉर्ड ऑफ ऑनर एवं गोल्ड मेडल: विशाल कुमार
सिल्वर मेडल: प्रिंस राज
ब्रॉन्ज मेडल: तेजस भट्ट
सिल्वर मेडल (TGC): ऋषभ मिश्रा
सिल्वर मेडल (TES): करण पांडेय
सिल्वर मेडल (SCO): बोधराज थापा
सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट: जैफ सादिद अल्वी (बांग्लादेश)
चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर: इंफाल कंपनी
उपस्थित प्रमुख हस्तियां
कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आर्मी ट्रेनिंग कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा, IMA कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह, डिप्टी कमांडेंट मेजर जनरल सचिन मलिक सहित अनेक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
IMA का महत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान
भारतीय सैन्य अकादमी देश की रक्षा व्यवस्था की रीढ़ है। यहां विश्व स्तरीय प्रशिक्षण के माध्यम से युवा कैडेटों को शारीरिक, मानसिक और नेतृत्व कौशल प्रदान किया जाता है। इस पासिंग आउट परेड के साथ नए अधिकारियों की पीढ़ी सेना में शामिल हुई है, जो सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और मानवीय सहायता अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।










