पौड़ी : उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। वन मंत्री सुबोध उनियाल के गांव औणी में रविवार शाम को गुलदार ने एक महिला पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे इलाज के लिए बेस अस्पताल श्रीनगर में भर्ती कराया गया है।
घटना का विस्तृत विवरण
रविवार 24 मई 2026 की शाम करीब 6 बजे की यह घटना है। विनीता देवी (45 वर्ष), पति किशोर कुमार, औणी गांव की रहने वाली हैं। वह पड़ोस के एक घर से दूध लेकर लौट रही थीं। गांव के रास्ते में गदेरे (नाले) के समीप घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उन पर हमला बोल दिया।
गुलदार ने महिला को घसीटना शुरू कर दिया। इस दौरान उनके पति किशोर कुमार ने बहादुरी दिखाते हुए गुलदार का पीछा किया और चीख-पुकार मचाकर उसे भगाने की कोशिश की। पति की सतर्कता और हिम्मत के कारण महिला की जान बच सकी, लेकिन गुलदार के पंजों और दांतों से उनके गले और कंधे पर गहरे घाव हो गए।
पूर्व ग्राम प्रधान गीता देवी ने बताया कि विनीता देवी रोज की तरह दूध लेने आई थीं। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। महिलाएं और बच्चे अब अकेले घर से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं।
वन मंत्री के गांव में गुलदार का आतंक
यह घटना इसलिए भी ज्यादा चर्चित हो रही है क्योंकि यह उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल का पैतृक गांव है। पौड़ी गढ़वाल जिले में पिछले कई वर्षों से गुलदार के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में अब तक गुलदार के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड के उन जिलों में शामिल है जहां मानव-वन्यजीव संघर्ष सबसे ज्यादा है। जंगलों की कटाई, आवासीय क्षेत्रों का विस्तार और जंगली जानवरों के लिए प्राकृतिक शिकार का कम होना इस समस्या की मुख्य वजह माना जा रहा है।
वर्तमान स्थिति और इलाज
विनीता देवी को प्राथमिक उपचार के बाद बेस अस्पताल श्रीनगर रेफर किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, उनके गले और कंधे के घाव गंभीर हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
स्थानीय लोगों की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि समस्या वाले क्षेत्रों में गुलदार को पकड़ने या स्थानांतरित करने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए जाएं और नियमित पेट्रोलिंग की जाए। कई लोग वन मंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील भी कर रहे हैं।









