उत्तराखंड : उत्तराखंड सरकार ने कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तबादला एक्ट लागू किया था। लेकिन कई विभागों में इस कानून की जमकर अनदेखी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग में गंभीर रूप से बीमार चिकित्सकों और दिव्यांग बच्चों वाले डॉक्टरों को पहाड़ी क्षेत्रों में तबादला कर दिया गया, जबकि खेल विभाग में दुर्गम क्षेत्रों के लिए पात्र अधिकारियों को सुगम पोस्टिंग दे दी गई। आयुर्वेदिक और शिक्षा विभाग भी तय समय सीमा का पालन नहीं कर पाए।
स्वास्थ्य विभाग में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं
स्वास्थ्य विभाग में तबादला एक्ट के प्रावधानों की सबसे ज्यादा अनदेखी हुई है। प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ के प्रांतीय मीडिया प्रभारी डॉ. रचित गर्ग के अनुसार, लगभग 40 से 50 चिकित्सकों के तबादलों में नियमों को दरकिनार किया गया।
बीमार चिकित्सकों को पहाड़ी जिलों में भेजा गया है। हरिद्वार में तैनात एक गंभीर बीमार डॉक्टर का बागेश्वर तबादला कर दिया गया। वहीं, हल्द्वानी में कार्यरत एक चिकित्सक का, जिनके बच्चे दिव्यांग हैं, अल्मोड़ा तबादला किया गया। तबादला एक्ट में दिव्यांग बच्चे वाले अभिभावक चिकित्सकों को अनिवार्य तबादलों से छूट दी गई है, लेकिन इस प्रावधान को नजरअंदाज किया गया।
खेल विभाग में सुगम से सुगम तबादलों का खेल
खेल विभाग में तबादला नीति की और भी चौंकाने वाली अनदेखी सामने आई है। पात्रता सूची में 20 वर्ष से अधिक सुगम क्षेत्र में सेवा कर चुके एक अधिकारी का नाम दुर्गम तबादले के लिए था, लेकिन उनका तबादला सुगम क्षेत्र में ही कर दिया गया।
एक अन्य अधिकारी की सात वर्ष की सुगम सेवा दर्ज थी, जिसके अनुसार उन्हें दुर्गम क्षेत्र में भेजा जाना चाहिए था। लेकिन उनका भी सुगम से सुगम तबादला कर दिया गया। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ (सिंचाई विभाग) के प्रांतीय अध्यक्ष अनिल पंवार ने बताया कि अनिवार्य और अनुरोध आधारित तबादलों में भी एक्ट का पालन नहीं किया गया। कई सहायक अभियंता जो पात्रता सूची में नहीं थे, उन्हें तबादला मिल गया, जबकि कुछ के विकल्पों को पूरी तरह नजरअंदाज कर मनमाने तबादले किए गए।
आयुर्वेदिक विभाग: आवेदनों पर नहीं हुआ विचार
आयुर्वेदिक विभाग में तबादला समिति तय समय पर आवेदनों पर विचार नहीं कर पाई। शासन द्वारा 20 दिन का अतिरिक्त समय दिए जाने के बावजूद विभाग 30 जून तक चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के तबादले नहीं कर सका। इससे कई कर्मचारियों की व्यावसायिक योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
शिक्षा विभाग: समयसीमा चूकी, प्रस्ताव लंबित
तबादला एक्ट के अनुसार शिक्षा विभाग को 10 जून तक तबादले पूरे करने थे। लेकिन विभाग इस समयसीमा को पूरा नहीं कर पाया। शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने बताया कि अतिरिक्त समय के लिए कार्मिक विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक सहमति नहीं मिली है।










