उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट गई है। पार्टी हैट्रिक बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है और इसके लिए टिकट वितरण की प्रक्रिया पहले से ही गति पकड़ चुकी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कई सीटों पर एक साथ पांच से सात दावेदारों के नाम चर्चा में हैं, जिससे टिकट की जंग और दिलचस्प होने की संभावना है।
किन सीटों पर सबसे ज्यादा दावेदार?
पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि टिहरी, यमकेश्वर, डोईवाला, धनौल्टी, केदारनाथ और प्रतापनगर जैसी सीटों पर टिकट के सर्वाधिक दावेदार सामने आ रहे हैं। इन क्षेत्रों में मजबूत चेहरों की संख्या अधिक होने के कारण पार्टी नेतृत्व को अंतिम निर्णय लेने में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है। जहां वर्तमान में भाजपा का विधायक है, वहां सामान्यतः उसी को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, यदि सर्वे में विधायक की स्थिति बेहद कमजोर पाई जाती है तो उच्च स्तर पर बदलाव पर विचार किया जा सकता है।
हैट्रिक का लक्ष्य और चुनावी रणनीति
भाजपा ने 2027 के चुनाव में लगातार तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पार्टी ग्रासरूट स्तर पर व्यापक सर्वे कर रही है। उम्मीदवारों के वजन को तोलने के लिए कई स्तरों पर फीडबैक लिया जा रहा है। जिला, मंडल और बूथ स्तर के संगठन से नियमित रिपोर्ट मांगी जा रही है। हाल ही में संसदीय क्षेत्रवार सांसदों और विधायकों की बैठक में जिला स्तर के संगठनों से दावेदारों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया कि टिकट पर अंतिम निर्णय केंद्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड ही करता है। फिलहाल सर्वे का काम चल रहा है। पहले चरण में पार्टी का विशेष फोकस उन सीटों पर है जिन्हें पिछले चुनाव में पार्टी ने गंवा दिया था। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सीट को जीतने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन हारी हुई सीटों को वापस पाना इस बार प्राथमिकता है।
हारी हुई सीटों पर दमदार प्रत्याशी की तलाश
महेंद्र भट्ट ने बताया कि हारी हुई सीटों पर कई मजबूत दावेदार सामने आ रहे हैं। अब रायसुमारी और संगठन के फीडबैक के आधार पर सबसे उपयुक्त चेहरे की पहचान की जा रही है। इन क्षेत्रों पर जिला, मंडल और बूथ स्तर के संगठन को विशेष ध्यान देने को कहा गया है। साथ ही सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को भी मैदान में उतारा जा चुका है ताकि जमीनी हकीकत का सही आकलन हो सके।
पार्टी की रणनीति के अनुसार सर्वे के नतीजे, संगठनात्मक ताकत और स्थानीय जनसमर्थन को ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय किए जाएंगे। यह प्रक्रिया अगले कुछ महीनों में और तेज होने वाली है। सूत्रों के अनुसार टिकट की होड़ में शामिल कई नेता सक्रिय रूप से क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड भाजपा 2027 के चुनाव को लेकर पूरी तरह अलर्ट है। हैट्रिक का लक्ष्य हासिल करने के लिए पार्टी न सिर्फ मौजूदा सीटों को बचाने बल्कि हारी हुई सीटों को वापस पाने पर भी फोकस कर रही है। टिकट वितरण की यह प्रक्रिया पार्टी के अंदर प्रतिस्पर्धा को बढ़ा रही है, जो आने वाले महीनों में और भी रोचक रूप ले सकती है।








