जोशीमठ हेलिकॉप्टर हादसा: सभी 6 शव बरामद करने में जुटीं रेस्क्यू टीमें, 10-12 KM पैदल चलकर सड़क तक लाए जाएंगे शव, DGCA और AAIB करेगी हादसे की जांच
उत्तराखंड के चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हुए दर्दनाक हेलिकॉप्टर हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के शव देर रात भारतीय सेना ने अपने कब्जे में ले लिए थे। हालांकि, अंधेरा होने और घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता बेहद दुर्गम होने के कारण शवों को रात में सड़क तक नहीं पहुंचाया जा सका। इसके चलते रात में रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा।
शनिवार सुबह एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और भारतीय सेना के जवान एक बार फिर घटनास्थल पर पहुंचे और शवों को सड़क तक लाने का अभियान शुरू किया। घटनास्थल से सड़क की दूरी करीब 10 से 12 किलोमीटर है, जिसे जवानों को पैदल तय करना पड़ रहा है। पहाड़ी रास्ता बेहद कठिन होने के साथ-साथ शवों की हालत भी काफी क्षत-विक्षत बताई जा रही है। ऐसे में रेस्क्यू टीमों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन के अनुसार, सुरक्षा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जवान पूरी सतर्कता के साथ अभियान चला रहे हैं।
वहीं, इस दर्दनाक हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी AAIB और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA की विशेषज्ञ टीम जांच करेगी। शनिवार को विशेषज्ञों की टीम उत्तराखंड पहुंचेगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर हेलिकॉप्टर हादसे का कारण क्या रहा।
गौरतलब है कि इस साल चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में यह पहला हेलिकॉप्टर हादसा है। हालांकि, वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा के दौरान पांच हेलिकॉप्टर हादसे हुए थे। इनमें तीन मामलों में आपातकालीन लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त हुए थे, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई थी। वहीं, उत्तरकाशी और केदार घाटी में हुए दो बड़े हेलिकॉप्टर हादसों में पायलट समेत कुल 13 लोगों की जान चली गई थी।
इन लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद प्रदेश सरकार और DGCA ने हेलिकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए थे। अब एक बार फिर इस हादसे ने चारधाम यात्रा के दौरान हेलिकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।











