डोईवाला : देहरादून जिले के डोईवाला विकासखंड में तैनात प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी और उप शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट को रिश्वत लेते हुए विजिलेंस विभाग की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। पूरी घटना नेपाली फार्म इलाके में हुई, जहां आरोपी अपनी निजी गाड़ी से रिश्वत की रकम लेने पहुंचे थे। विजिलेंस टीम ने शिकायतकर्ता के आधार पर सटीक प्लानिंग के साथ ट्रैप तैयार किया और आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया।
इसके साथ ही एक महिला पुष्पांजलि को भी सह-आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपियों को तुरंत रायवाला कोतवाली ले जाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। विजिलेंस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और जल्द ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी उप शिक्षा अधिकारी कौन हैं? धनवीर सिंह बिष्ट का पूरा परिचय
धनवीर सिंह बिष्ट पुत्र गिंदू सिंह, डोईवाला विकासखंड के प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी और उप शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात हैं। वे हाल ही में इस पद पर तैनात हुए थे। शिकायतकर्ता ने थाना सतर्कता सेक्टर देहरादून में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि धनवीर सिंह बिष्ट ऋषिकेश क्षेत्र के एक निजी स्कूल के आरटीई के तहत अध्ययनरत छात्रों के बिल भुगतान (प्रतिपूर्ति) के एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के अंतर्गत निजी स्कूलों को EWS और वंचित वर्ग के बच्चों की पढ़ाई का खर्च सरकार से मिलता है। इसी भुगतान प्रक्रिया में आरोपी अधिकारी ने रिश्वत की मांग की थी।
सह-आरोपी पुष्पांजलि का नाम और कनेक्शन
गिरफ्तार महिला पुष्पांजलि लेन नंबर 5, डालनवाला, देहरादून की निवासी हैं। वर्तमान में वे गुमानीवाला स्थित एक निजी स्कूल में तैनात हैं। विजिलेंस टीम के अनुसार पुष्पांजलि आरोपी अधिकारी के साथ इस रिश्वतखोरी में सहयोगी की भूमिका निभा रही थीं। दोनों को नेपाली फार्म पर ही एक साथ पकड़ा गया।
आरटीई योजना और रिश्वतखोरी का तरीका: स्कूल संचालकों पर क्या बीत रही थी?
आरटीई (Right to Education) योजना के तहत निजी विद्यालयों को 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी पड़ती हैं। सरकार इन बच्चों की फीस, किताबें और अन्य खर्च की प्रतिपूर्ति (reimbursement) करती है। बिल पास करने और भुगतान कराने में कई बार अधिकारी देरी करते हैं और रिश्वत मांगते हैं। इसी प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए धनवीर सिंह बिष्ट ने स्कूल संचालक से एक लाख रुपये की मांग की थी।
शिकायतकर्ता ने जब रिश्वत देने से इनकार किया और विजिलेंस को सूचित किया, तब विभाग ने तुरंत एक्शन लिया। यह केस शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की गंभीर समस्या को उजागर करता है।
विजिलेंस विभाग की सराहनीय भूमिका और ट्रैप का तरीका
उत्तराखंड विजिलेंस टीम ने शिकायत मिलते ही तुरंत जाल बिछाया। आरोपी नेपाली फार्म पहुंचे तो टीम ने उन्हें अपनी निजी गाड़ी से रिश्वत की रकम लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इस पूरे ऑपरेशन में गोपनीयता और सटीक समयबद्धता का पूरा ध्यान रखा गया।
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में शिकायतकर्ताओं को आगे भी प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता बनी रहे।
आगे क्या होगा? कानूनी कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया
दोनों आरोपियों से रायवाला कोतवाली में पूछताछ जारी है। विजिलेंस टीम पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। अगर आरोपी दोषी पाए गए तो उनकी नौकरी पर भी असर पड़ सकता है।












