देहरादून: उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से एक बड़ी सामने आ रही है।
आपको बता दें डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नंदन सिंह बिष्ट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। डॉ. बिष्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निजी चिकित्सक के रूप में भी सेवाएं दे रहे थे, जिससे उनके इस्तीफे को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य प्रो. डॉ. गीता जैन ने इस्तीफे की पुष्टि की है। सूत्रों के अनुसार, डॉ. बिष्ट ने तीन-चार दिन पहले अपना इस्तीफा प्राचार्य को सौंपा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।
इस्तीफे के पीछे क्या हैं कारण?
अस्पताल प्रशासन में पिछले कुछ समय से विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों को लेकर बहस चल रही थी। इनमें आयुष्मान भारत योजना से जुड़े मामले और हाल ही में मैस (कैंटीन/मेस) व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की जांच प्रमुख हैं। मैस मामले की जांच रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है।
कुछ सूत्रों का मानना है कि डॉ. बिष्ट का इस्तीफा आंतरिक खींचतान और प्रशासनिक मतभेदों का परिणाम हो सकता है। हालांकि, दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अभी तक इस्तीफे के आधिकारिक कारणों पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
डॉ. नंदन सिंह बिष्ट का योगदान
डॉ. नंदन सिंह बिष्ट लंबे समय से दून अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट के पद पर उनकी जिम्मेदारियां अस्पताल की दैनिक सुचारू कार्यप्रणाली, चिकित्सा सेवाओं के प्रबंधन और स्टाफ कोऑर्डिनेशन तक फैली हुई थीं। मुख्यमंत्री के निजी चिकित्सक के रूप में वे उच्च पदाधिकारियों की स्वास्थ्य देखभाल में भी सक्रिय रहे हैं।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, मेडिकल शिक्षा और आपातकालीन सुविधाओं के लिए यह अस्पताल पूरे प्रदेश पर निर्भर है।
इस्तीफे से प्रशासनिक चुनौतियां
डॉ. बिष्ट के इस्तीफे के बाद अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश के सबसे व्यस्त सरकारी अस्पताल में इस महत्वपूर्ण पद के खाली होने से दैनिक कार्यों, नीति कार्यान्वयन और समन्वय प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में जब स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत है, प्रशासनिक स्थिरता अत्यंत आवश्यक है।
प्रशासन की ओर से जल्द नए डिप्टी एमएस की नियुक्ति की उम्मीद की जा रही है ताकि सेवाएं निर्बाध चलती रहें।
आयुष्मान योजना और मैस अनियमितताओं की जांच
हाल के महीनों में आयुष्मान योजना के तहत दावों की प्रक्रिया और अस्पताल की मेस व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे थे। इन जांचों का परिणाम क्या होगा और क्या इससे आगे कोई कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच प्रक्रिया को गंभीरता से लिया है और पारदर्शिता बनाए रखने का भरोसा दिया है।










