रिपोर्ट : आरव सिंह
हस्तक्षेप डेस्क
कोटद्वार : कोटद्वार के पोखड़ा रेंज इलाके में एक बार फिर गुलदार (लेपर्ड) का आतंक देखने को मिला है। ग्राम धस्माणी निवासी 11 वर्षीय दीपक सिंह पुत्र सतेंद्र सिंह को गुलदार ने उनके घर से ही उठा लिया। यह घटना इतनी तेजी से हुई कि परिवार वाले पहले तो समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है। गुलदार बच्चे को मुंह में दबाकर करीब 20-25 मीटर दूर जंगल की ओर ले गया। लेकिन परिजनों ने तुरंत शोर मचाया और एकजुट होकर दौड़े। डर के मारे गुलदार बच्चे को जमीन पर छोड़कर भाग गया। यह घटना स्थानीय लोगों में दहशत फैला रही है।
घटना का पूरा विवरण
घटना पोखड़ा रेंज के धस्माणी गांव की है, जो घने जंगलों से घिरा हुआ है। शाम के समय बच्चा घर के आंगन या आसपास था, जब अचानक गुलदार ने हमला बोल दिया। गुलदार ने बच्चे को आसानी से उठाया और घर से बाहर की ओर ले जाने लगा। परिजनों ने चीख-पुकार मचाई और लाठियां-डंडे लेकर दौड़े। शोर सुनकर गुलदार घबरा गया और बच्चे को छोड़कर जंगल में गायब हो गया। दीपक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव खाल ले जाया गया, जहां से उनकी हालत देखते हुए जिला चिकित्सालय पौड़ी रेफर किया गया। वहां से भी डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर भेज दिया है। बच्चे की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन चोटें गंभीर हैं।

उत्तराखंड में गुलदार हमलों का बढ़ता खतरा
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब आम बात हो गई है। कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल, लैंसडाउन और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार अक्सर गांवों में घुस आते हैं। जंगलों की कटाई, आवास की कमी और आबादी का बढ़ना इसके मुख्य कारण हैं। हाल के महीनों में कई बच्चे और महिलाएं गुलदार के हमलों का शिकार बने हैं। पोखड़ा रेंज जैसे इलाकों में गुलदार का आतंक पहले से ही बना हुआ है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। वन विभाग ने कई बार जाल बिछाए और ट्रैप लगाए हैं, लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हो रही।

परिजनों की बहादुरी और स्थानीय दहशत
इस घटना में दीपक के परिवार की बहादुरी सराहनीय है। अगर वे समय रहते शोर नहीं मचाते तो मामला बहुत गंभीर हो सकता था। गांव वालों में अब डर का माहौल है। बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं और महिलाएं अकेले बाहर नहीं निकल रही हैं। स्थानीय लोग वन विभाग से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गुलदार हमलों से बचने के लिए:
शाम ढलने के बाद बच्चे घर के अंदर रहें।
घर के आसपास लाइटें जलाएं और शोर मचाने वाले यंत्र लगाएं।
कूड़ा-कचरा खुले में न फेंकें, इससे गुलदार आकर्षित होते हैं।
वन विभाग की हेल्पलाइन पर तुरंत सूचना दें।
उत्तराखंड में ऐसे हमले रोकने के लिए वन विभाग को और सख्त कदम उठाने होंगे। इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि जंगलों के साथ रहना कितना चुनौतीपूर्ण है। दीपक सिंह के जल्द स्वस्थ होने की कामना के साथ स्थानीय प्रशासन से अपील है कि ऐसे मामलों पर तुरंत ध्यान दिया जाए।











