देहरादून : राजधानी में जमीन दिलाने के नाम पर बड़े खेल का खुलासा हुआ है। नगर निगम की कथित सरकारी भूमि दिलाने का झांसा देकर 75 लाख रुपये ऐंठने के आरोप में भाजपा की पूर्व पार्षद और उनके पति के खिलाफ रायपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर निगम की जमीन का आवंटन कराने का भरोसा दिलाया गया और “ऊपर तक पैसे देने” की बात कहकर अलग-अलग समय पर मोटी रकम ली गई। जब जमीन नहीं मिली और रकम वापस मांगी गई तो कथित तौर पर एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी गई।
मामले में यह भी सामने आया है कि दोनों पक्षों के बीच 42.50 लाख रुपये लौटाने का समझौता हुआ था, जिसमें से आंशिक भुगतान के बाद शेष राशि अटकी रह गई। पीड़ित का दावा है कि समझौते के बावजूद पूरी रकम नहीं लौटाई गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की ओर से अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीति में सेवा का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि अगर जमीन के नाम पर भरोसे की नींव ही हिला दें, तो सवाल सिर्फ रकम का नहीं, सिस्टम की साख का भी खड़ा होता है। “ऊपर तक पहुंच” की दुहाई देकर नीचे वालों से वसूली—क्या यही जनसेवा का नया मॉडल है









