उद्यमसिंह नगर : रुद्रपुर-लालकुआं क्षेत्र के एक साधारण परिवार में एक दिन पहले खुशियों का माहौल था, लेकिन कल एक दर्दनाक घटना ने सब कुछ बदल दिया। पंतनगर बाजार से नाती के लिए नए कपड़े लाकर लौटीं मैनादेवी अगले ही दिन जंगल में हाथी के हमले का शिकार बन गईं। उनकी मौत ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है।
घटना का विवरण
घर में गैस सिलिंडर खत्म होने के कारण मैनादेवी रोज की तरह लकड़ी लेने जंगल गई थीं। परिवार के सदस्यों के अनुसार, यह उनके लिए एक नियमित काम था। लेकिन इस बार जंगल ने उन्हें वापस नहीं लौटने दिया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हाथी ने अचानक हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और शव को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस और वन विभाग की टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
परिवार की दर्द भरी कहानी
मैनादेवी के बेटे कृष्ण कुमार ने गहरे दर्द के साथ बताया, “मां कल नाती के लिए कपड़े लेकर आई थीं। उनके चेहरे पर खुशी छलक रही थी। वे खुद नाती को कपड़े पहनाना चाहती थीं। आज सुबह वे बस चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी लेने गईं और…।” कृष्ण कुमार की आंखें नम हो जाती हैं। पूरा परिवार अभी भी सदमे से बाहर नहीं निकल पाया है।
मैनादेवी परिवार की रीढ़ थीं। घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ वे नाती-पोतों की देखभाल भी करती थीं। उनका अचानक चला जाना परिवार को पूरी तरह से टूटा हुआ महसूस करा रहा है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में राज्य में हाथी हमलों में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों का लगातार सिकुड़ना, आवासीय क्षेत्रों का विस्तार और खाद्य संसाधनों की कमी इस समस्या की मुख्य वजहें हैं।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय निवासियों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाथियों को भगाने के लिए सोलर बाड़ी, ट्रेंच और नियमित पेट्रोलिंग की जरूरत है। साथ ही मृतक परिवार को उचित मुआवजा और सहायता प्रदान की जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
वन विभाग के अधिकारियों ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जंगली क्षेत्रों में अकेले न जाएं और हाथी दिखने पर तुरंत सूचना दें।









