देहरादून के निजी स्कूल में छात्रा से छेड़छाड़ का आरोप, सोशल मीडिया पर पुराने दावों से मचा हड़कंप!
देहरादून के एक निजी स्कूल में छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद अब यह विवाद सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। एक छात्रा की शिकायत से शुरू हुआ मामला अब इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि कई पूर्व छात्र-छात्राएं सोशल मीडिया पर सामने आकर आरोपी शिक्षक के व्यवहार को लेकर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कई पोस्ट और कमेंट सामने आए हैं। कुछ पूर्व छात्र-छात्राओं ने दावा किया है कि आरोपी शिक्षक को पहले भी राजधानी के तीन अन्य स्कूलों से हटाया जा चुका है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर मी टू आंदोलन जैसी चर्चा को जन्म दे दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आई थीं, तो क्या उन पर उचित कार्रवाई की गई थी? साथ ही, स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिकायतों पर प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
दरअसल, यह मामला शुक्रवार को सामने आया, जब देहरादून के एक निजी स्कूल की छात्रा ने शिक्षक पर अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया। परिजनों का आरोप है कि शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करने के बजाय स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने मामले को दबाने की कोशिश की।
परिजनों के मुताबिक, शिकायत लेकर स्कूल पहुंची छात्रा और उसकी मां को परिसर में घंटों रोके रखा गया। आरोप है कि इस दौरान स्कूल के गेट बंद कर ताले लगा दिए गए और उन्हें बाहर नहीं जाने दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए।
मामले में पुलिस ने आरोपी शिक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अब पुलिस की जांच के साथ-साथ सोशल मीडिया पर सामने आ रहे पुराने आरोपों को लेकर भी चर्चा हो रही है।
पूर्व छात्राओं ने साझा किए अनुभव
सोशल मीडिया पर एक छात्रा ने दावा किया कि वर्ष 2014 में आरोपी शिक्षक को एक अकादमी से हटाया गया था। छात्रा के अनुसार, उसने उस समय शिक्षक के व्यवहार को लेकर प्रबंधन से शिकायत की थी और इसके बाद कार्रवाई की गई थी।
वहीं, वर्ष 2005 में देहरादून के एक स्कूल में पढ़ चुकी एक युवती ने भी पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाया कि शिक्षक वहां भी इस तरह का व्यवहार कर चुका था। इसके अलावा, संबंधित स्कूल की एक छात्रा ने प्रबंधन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के व्यवहार और लड़कियों को लेकर कथित टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर साझा किए गए इन अनुभवों और दावों की पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि पहले कोई शिकायत दर्ज हुई थी या नहीं और संबंधित संस्थानों ने उस पर क्या कार्रवाई की थी।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और संस्थानों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें पुलिस जांच और सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।











