MBBS में फर्जी प्रमाणपत्रों से दाखिला कराने का बड़ा खुलासा! SIT ने तीन और आरोपियों को किया गिरफ्तार, अब तक 8 गिरफ्तारियां
देहरादून, उत्तराखंड।
उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरनगर निवासी प्रवीण कुमार, हरिद्वार निवासी जगपाल सिंह और बिजनौर निवासी रामपाल सिंह शामिल हैं। आरोप है कि इन्होंने अपनी बेटियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार करवाए थे। इस मामले में अब तक कुल आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
एसएसपी के निर्देश पर एसपी ग्रामीण-1 जया बलूनी के नेतृत्व में गठित एसआईटी इस पूरे मामले की जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार, 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेनटाउन थानों में सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से जमा कराए गए दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी पाए गए।
25 और 30 लाख रुपये देकर बनवाए प्रमाणपत्र
एसआईटी की पूछताछ में प्रवीण कुमार और जगपाल सिंह ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों खुशी और स्वाति के एमबीबीएस में दाखिले के लिए पहले गिरफ्तार किए जा चुके एजुकेशन कंसल्टेंट रूपेश पंडित से संपर्क किया था।
पुलिस के मुताबिक, रूपेश मेरठ में मिकोडो (MECODO) पाठशाला नाम से कंपनी चलाता था। आरोप है कि वह निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काम करता था।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, बेटियों के दाखिले के लिए फर्जी आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार करवाए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर खुशी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराया गया, जबकि स्वाति को नीट काउंसलिंग में शामिल कराया गया था।
पुलिस के अनुसार, प्रमाणपत्र तैयार करवाने के लिए प्रवीण कुमार ने रूपेश पंडित को 25 लाख रुपये, जबकि जगपाल सिंह ने 30 लाख रुपये दिए थे।
फिलहाल, एसआईटी मामले की जांच में जुटी है। अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उनके आधार पर दाखिला दिलाने के इस कथित नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।











