देहरादून : 15 फरवरी 2026: श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू) के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के भूगोल विभाग ने “सतत विकास लक्ष्य: चुनौतियाँ एवं प्रगति” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हाइब्रिड सम्मेलन का सफल आयोजन किया। पथरीबाग परिसर के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत और विदेशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा पर्यावरण विशेषज्ञों ने भाग लिया और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा की।
सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के माननीय प्रेसिडेंट श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज ने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। कुलपति प्रो. (डॉ.) के. प्रतापन ने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से एसडीजी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच अकादमिक संवाद और नवाचार को बढ़ावा देते हैं।

मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की डीन प्रो. (डॉ.) प्रीति तिवारी ने सतत विकास को मानव समाज के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया। डीन छात्र कल्याण प्रो. (डॉ.) मालविका कांडपाल ने कहा कि यह सम्मेलन छात्रों और शोधार्थियों में पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना जगाता है।
मुख्य अतिथि पद्मश्री सम्मानित पर्यावरणविद् प्रेम चन्द्र शर्मा ने रसायन-मुक्त खेती और जैविक कृषि को पर्यावरण संरक्षण एवं स्वस्थ समाज के लिए अनिवार्य बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) मोहन सिंह पंवार (एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय) ने हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, घटती कृषि योग्य भूमि और जैव-विविधता संरक्षण की चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में यूनिवर्सिटी ऑफ केलनिया, श्रीलंका की डॉ. के. एल. वात्सला गुणवर्धने ने वैश्विक सहयोग, मजबूत नीतियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता बताई। थम्मासट विश्वविद्यालय, थाईलैंड के डॉ. मोहम्मद फहीम ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और नवाचार पर बल दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डॉ. महविश अंजुम ने कार्यस्थलों पर एर्गोनॉमिक समस्याओं और एआई आधारित समाधानों पर चर्चा की, जबकि एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. हसीबुर रहमान ने जलवायु परिवर्तन एवं स्वास्थ्य चुनौतियों पर विचार रखे।
दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) विजय कांत पुरोहित ने की, जिन्होंने हिमालयी जैव-विविधता और औषधीय पौधों के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया। तकनीकी सत्रों में शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, नीति-निर्माण, सामाजिक सहभागिता और सहयोगात्मक अनुसंधान की संभावनाओं पर विस्तृत विमर्श हुआ।
सम्मेलन की संयोजक डॉ. सुरेंद्र कौर रावल ने पृष्ठभूमि, उद्देश्य और धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सह-संयोजक प्रो. गीता रावत, डॉ. शिल्पी जैन एवं सचिव डॉ. सुनील किश्तवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-शोधार्थी उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में योगदान देने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।









